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प्रति एकड़ 60 हजार तक हुआ नुकसान मुआवजा मिला मात्र 36 व 46 रुपए

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

सूखा प्रभावित डभरा ब्लॉक के ग्राम कंसा के किसान उमाशंकर सोन को मुआवजे में 83.91 पैसे, गुरुबारी बाई को 87.52 पैसे, बडेकटेकोनी के बोधाराम को 76.07 पैसा, अकलतरा ब्लॉक के ग्राम झरिया के केकती बाई को 46.34 पैसा, आमापाली के रमेश कुमार को 51.83 रुपए मिलेे हैं। मालखरौदा ब्लॉक के ग्राम पिकरीपार के किसान शैलेन्द्र कुमार ने 5 एकड़ में धान की फसल का बीमा कराया था। भूरो माह से फसल खराब हो गई जिससे प्रति एकड़ के पीछे धान मात्र 7 से 9 बोरा ही मिला। शैलेंद्र कुमार को इतना नुकसान होने पर बीमा कंपनी ने 152 रुपए मुआवजा दिया।

ऐसी ही लंबी सूची है उन किसानों की जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने धान की फसल का बीमा कराने के बाद मुआवजा के नाम पर छले गए हैं। इस वर्ष कम बारिश के कारण चार ब्लॉकों को डभरा, अकलतरा, डभरा और बलौदा, जैजैपुर को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इन ब्लॉकों में अनावारी रिपोर्ट के अनुसार फसल प्रभावित हुई है। इसी नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई है, लेकिन इससे किसानों को फायदा कम नुकसान अधिक हो रहा है।

471 रुपए प्रति हेक्टेयर बीमा की राशि पटाने के बाद मुआवजा प्रीमियम की राशि जितना भी नहीं मिल रहा है। सूखे की मार और कीट प्रकोप के चलते एक हेक्टेयर में 15 से 30 हजार रुपए तक नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार खरीफ के लिए जिले में 72 हजार 500 किसानों ने फसल बीमा कराया था। 8 करोड़ 28 हजार 559 रुपए प्रीमियम इफको टोकियो बीमा कंपनी में किसानों ने भरे। इनमें से 3855 किसानों को बीमा क्लेम की राशि जारी कर दी गई है जिसमें 48 किसान ऐसे हैं जिन्हें 100 रुपए से भी कम मुआवजा मिला है।

72500 किसानों ने बीमा के लिए जमा किया था 8 करोड़ 28 हजार 559 रुपए प्रीमियम

लाभ नहीं मिलने से बीमा कराने घट रही किसानों की संख्या

फसल नुकसान होने के बाद भी पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने से किसान भी बीमा नहीं कराना चाहते। इस कारण से बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में कम हो रही है। त्रणी किसानों के दम पर ही योजना चल रही है क्योंकि इनकाे बीमा कराना अनिवार्य है। जबकि खुद से बीमा कराने वाले अऋणी किसानों की संख्या काफी कम है। खरीफ सीजन 2016-17 में 86 हजार 960 किसानों का बीमा हुआ था। इसमें ऋणी 82 हजार 105 व अऋणी 4855 थे। खरीफ सीजन 2017-18 में 72 हजार 500 किसानों ने बीमा कराया है। इसमें ऋणी किसान 70 हजार 53 व अऋणी 2447 थे।

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

सूखा प्रभावित डभरा ब्लॉक के ग्राम कंसा के किसान उमाशंकर सोन को मुआवजे में 83.91 पैसे, गुरुबारी बाई को 87.52 पैसे, बडेकटेकोनी के बोधाराम को 76.07 पैसा, अकलतरा ब्लॉक के ग्राम झरिया के केकती बाई को 46.34 पैसा, आमापाली के रमेश कुमार को 51.83 रुपए मिलेे हैं। मालखरौदा ब्लॉक के ग्राम पिकरीपार के किसान शैलेन्द्र कुमार ने 5 एकड़ में धान की फसल का बीमा कराया था। भूरो माह से फसल खराब हो गई जिससे प्रति एकड़ के पीछे धान मात्र 7 से 9 बोरा ही मिला। शैलेंद्र कुमार को इतना नुकसान होने पर बीमा कंपनी ने 152 रुपए मुआवजा दिया।

ऐसी ही लंबी सूची है उन किसानों की जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपने धान की फसल का बीमा कराने के बाद मुआवजा के नाम पर छले गए हैं। इस वर्ष कम बारिश के कारण चार ब्लॉकों को डभरा, अकलतरा, डभरा और बलौदा, जैजैपुर को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इन ब्लॉकों में अनावारी रिपोर्ट के अनुसार फसल प्रभावित हुई है। इसी नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई है, लेकिन इससे किसानों को फायदा कम नुकसान अधिक हो रहा है।

471 रुपए प्रति हेक्टेयर बीमा की राशि पटाने के बाद मुआवजा प्रीमियम की राशि जितना भी नहीं मिल रहा है। सूखे की मार और कीट प्रकोप के चलते एक हेक्टेयर में 15 से 30 हजार रुपए तक नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार खरीफ के लिए जिले में 72 हजार 500 किसानों ने फसल बीमा कराया था। 8 करोड़ 28 हजार 559 रुपए प्रीमियम इफको टोकियो बीमा कंपनी में किसानों ने भरे। इनमें से 3855 किसानों को बीमा क्लेम की राशि जारी कर दी गई है जिसमें 48 किसान ऐसे हैं जिन्हें 100 रुपए से भी कम मुआवजा मिला है।

इन मापदंडों पर मिलता है लाभ

फसल नुकसान होने पर किसानों को क्षतिपूर्ति देने के लिए राज्य शासन फसल कटाई प्रयोग पर आधारित वास्तविक उपज के आंकड़े बीमा कंपनी को उपलब्ध कराती है। यदि फसल की वास्तविक उपज निर्धारित उपज से कम होती है तो अधिसूचित क्षेत्र में फसल लगाने वाले सभी किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। एक पटवारी हल्के में अगर औसत फसल नष्ट होती है तो लाभ दिया जाता है।

1-2 खेतों को देखकर रिपोर्ट बनती है

क्रॉप कटिंग प्रयोग के जरिए फसल उत्पादन का आंकलन करते हैं। आपदा आने पर नजरी आनावरी कर रिपोर्ट रेवेन्यू विभाग से होकर बीमा कंपनी को भेजा जाता है। इस रिपोर्ट में एक-दो खेतों को देखकर गांव की रिपोर्ट बनती है। रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय होता है। मुआवजा राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है। एलएम भगत उपसंचालक कृषि जांजगीर-चांपा

इस तरह बर्बाद हुई थी धान की फसल

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