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मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का मुफ्त में किया जाएगा इलाज

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जिला अस्पताल परिसर में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का मुफ्त में इलाज होगा। आंख कमजोर, मंदबुद्धि, श्रवण बाधित और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को यहां इलाज की सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब 76 लाख रुपए से डीआईसी यूनिट को तैयार कराया गया है। मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के इलाज के लिए अब जिले के लोगों को रायपुर-बिलासपुर जाना नहीं पड़ेगा। नाक, कान, आंख समेत मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का इलाज एक ही केन्द्र में संभव होगा। यूनिट में डेंटल एक्सरे, डेंटल चेयर, बेरा मशीन और आडियोमेट्री मशीनें लगेंगी।

नवजात और पांच साल तक उम्र के बच्चे सुन सकते है या नहीं इसकी जांच बेरा टेस्ट के जरिए ही हो सकती है। जिले में यह सुविधा अब तक नहीं है। डीआईसी यूनिट में बेरा टेस्ट और आडियोमेट्री टेस्ट की सुविधा रहेगी। पिछले दिनों राज्य सरकार ने यूनिट के लिए बेरा टेस्ट और आडियोमेट्री मशीनें भेज दी गई है। यह मशीनें करीब 10 लाख रुपए की बताई जा रही है। यूनिट के लिए जल्द ही दूसरी मशीनें भी आने वाली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी मशीनें आने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद यूनिट को शुरू करने की बात स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही है।

डीआईसी के लिए बेरा मशीन और आडियोमेट्री मशीनें पहुंची

यहां रखकर किया जाएगा मानसिक रूप से विकलांग बच्चों का इलाज

डीआईसी यूनिट से यह होगा फायदा

डीआईसी यूनिट में श्रवण बाधित बच्चों की जांच आधुनिक मशीनों से होगी। जिले में बेरा टेस्ट की सुविधा अभी नहीं है। दूसरा, यहां आडियोमेट्री जांच की सुविधा भी होगी। बड़े अस्पतालों में नवजात के जन्म के बाद ही हेयरिंग टेस्ट कराया जाता है कि बच्चा सुन पा रहा है या नहीं, यह जांच भी यहां हो सकी। दूसरी आडियोमेट्री जांच की सुविधा भी रहेगी। इससे सुनने की क्षमता जांची जाती है मरीज कितना सुनने की क्षमता रहता है। इसी आधार पर डॉक्टर दिव्यांग सर्टिफिकेट तैयार करते हैं। इसके लिए जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को बिलासपुर-रायपुर जाकर यहां टेस्ट कराना होता है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर प्रमाण पत्र तैयार करते हैं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का मांगा सेटअप

डीआईसी यूनिट में मनोचिकित्सक, नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ की पदस्थापना की जाएगी। डेढ़ साल पहले यूनिट का निर्माण जनवरी 2016 में शुरू हुआ था तब स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त संचालक से विशेषज्ञ डॉक्टरों की जानकारी मंगाई गई थी। सेटअप के तहत सीएमएचओ कार्यालय से जानकारी भेजी गई थी जिसकी स्वीकृति मिल गई थी। हालांकि डॉक्टरों की पदस्थापना अभी नहीं हो पाई है। ऐसे में जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों से यहां आने वाले बच्चों का इलाज करेंगे।

नए पदस्थापना तक डॉ. जगत देखेंगे काम

डीआईसी यूनिट के लिए अलग सेट अप की मांग की गई है, लेकिन अभी तक पदस्थापना नहीं हो पाई है, फिर भी यूनिट शुरू होगा। जिला अस्पताल के एमडी मेडिसन डा. अनिल जगत को करीब डेढ़ साल पहले स्पर्श थैरेपी की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। वे इस प्रकार के मानसिक रोगियों की प्राथमिक जांच करते रहे हैं। इसलिए ऐसी संभावना है कि जब तक डॉक्टर आएं तब तक डॉ. जगत ही मानसिक विकलांग बच्चों की जांच करेंगे। नाक, कान, गला रोग के विशेषज्ञ डॉ. संदीप साहू मशीन से परीक्षण करेंगे।

कुछ और मशीनें आने के बाद यूनिट को शुरू कर दिया जाएगा

जिला अस्पताल परिसर में डीआईसी यूनिट का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में ही मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के मुफ्त में इलाज सुविधा लोगों को डीआईसी यूनिट में मिलेगी। दो मशीनें भी यूनिट के लिए आई चुकी है। कुछ मशीनें अभी और आना बाकी है। इसके लिए यूनिट प्रारंभ कर दिया जाएगा। डॉक्टर समेत स्टाफ के लिए मांग की गई है। गिरीश कुर्रे, डीपीएम जांजगीर-चांपा

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