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धरने पर बैठे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने कहा... सीईओ के खिलाफ भी हो एफआईआर

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जनपद पंचायत पामगढ़ में तालाबंदी का मामला समझाइश पर अधिकारियों ने निपटा तो लिया, पर जनप्रतिनिधियों का विरोध का तरीका कानून के खिलाफ होने के कारण उनके विरुद्ध कई धाराओं में मामला दर्ज हो गया है।

अब वे अपने खिलाफ दर्ज मामला को रद्द करने या फिर सीईओ के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करते हुए सड़क पर धरना प्रदर्शन करने लगे हैं। शनिवार से पामगढ़ में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। कानून के जानकार बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने अपने संवैधानिक अधिकार के बाहर जाकर काम किया है, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ, अधिकारी के खिलाफ अपराध का प्रकरण ही नहीं बनता। जनपद पंचायत पामगढ़ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों का शुरू से ही सीईओ से तालमेल ठीक नहीं रहा है। अध्यक्ष डमरू मनहर का आरोप है कि सीईओ जनप्रतिनिधियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करतीं, जिसके कारण चुन कर आए प्रतिनिधि नाराज हाेते हैं। महिला सरपंचों ने भी सीईओ पर आरोप लगाया है।

गुरूवार 5 जुलाई को सीईओ ऋषा ठाकुर पर मनमानी और जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते हुए जनपद के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया था। सीईओ की रिपोर्ट पर जनपद अध्यक्ष डमरू मनहर,उपाध्यक्ष ललित नायक, जनपद सदस्य जवाहर यादव, लोमश पटेल, बिटावन बाई, कोमल खांडेकर, नीरबाई खांडेकर सहित सात अन्य सदस्यों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा सहित अन्य धाराओं के तहत जुर्म दर्ज हुआ है। जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारी पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करने की मांग की है, जिसे पुलिस ने अभी माना नहीं है, उनके आवेदन की जांच की जा रही है।

जानकार कह रहे सीईओ के खिलाफ नहीं बनेगा मामला

पामगढ़ में धरना प्रदर्शन करते जनपद सदस्य ।

यह है सदस्यों का संवैधानिक अधिकार
जानकारों के अनुसार यदि किसी जनप्रतिनिधि को लगता है कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहा है, या उनका अपमान हो रहा है तो विरोध का सही तरीका ही यही है कि वे अधिकारी के बैठक में न जाएं। प्रस्ताव या अन्य मामलों में हस्ताक्षर न करें। सभा का या बैठक का बहिष्कार कर सकते हैं।

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

जनपद पंचायत पामगढ़ में तालाबंदी का मामला समझाइश पर अधिकारियों ने निपटा तो लिया, पर जनप्रतिनिधियों का विरोध का तरीका कानून के खिलाफ होने के कारण उनके विरुद्ध कई धाराओं में मामला दर्ज हो गया है।

अब वे अपने खिलाफ दर्ज मामला को रद्द करने या फिर सीईओ के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करते हुए सड़क पर धरना प्रदर्शन करने लगे हैं। शनिवार से पामगढ़ में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। कानून के जानकार बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने अपने संवैधानिक अधिकार के बाहर जाकर काम किया है, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ, अधिकारी के खिलाफ अपराध का प्रकरण ही नहीं बनता। जनपद पंचायत पामगढ़ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों का शुरू से ही सीईओ से तालमेल ठीक नहीं रहा है। अध्यक्ष डमरू मनहर का आरोप है कि सीईओ जनप्रतिनिधियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करतीं, जिसके कारण चुन कर आए प्रतिनिधि नाराज हाेते हैं। महिला सरपंचों ने भी सीईओ पर आरोप लगाया है।

गुरूवार 5 जुलाई को सीईओ ऋषा ठाकुर पर मनमानी और जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते हुए जनपद के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया था। सीईओ की रिपोर्ट पर जनपद अध्यक्ष डमरू मनहर,उपाध्यक्ष ललित नायक, जनपद सदस्य जवाहर यादव, लोमश पटेल, बिटावन बाई, कोमल खांडेकर, नीरबाई खांडेकर सहित सात अन्य सदस्यों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा सहित अन्य धाराओं के तहत जुर्म दर्ज हुआ है। जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारी पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करने की मांग की है, जिसे पुलिस ने अभी माना नहीं है, उनके आवेदन की जांच की जा रही है।

जानिए क्या कहते हैं कानून के जानकार
अपर लोक अभियोजक रेवती रमन तिवारी के अनुसार सीईओ जनपद की अधिकारी है इस वजह से पूरा परिसर उनका है, उस परिसर में ताला लगाने का अधिकार किसी को नहीं है, वहां तालाबंदी करना कानून अपराध है। पामगढ़ के मामले में तो सीईओ के खिलाफ अपराध ही नहीं बनता। तालाबंदी कानून के अनुसार विराेध का सही तरीका ही नहीं है।

सीईओ अधिकारी, परिसर उनका इसलिए दर्ज हुआ मामला
जनपद पंचायत का सबसे बड़ा अधिकारी वहां का सीईओ होता है, इसलिए पूरा परिसर उनके अधीन माना जाता है। इस परिसर में ताला बंदी का संवैधानिक अधिकार न तो अध्यक्ष को है और न ही किसी सदस्य को। इससे बाहर जाकर सदस्याें ने ताला लगाया इसलिए मामला दर्ज हुआ है।

या तो एफआईआर करें या हमारे खिलाफ मामला रद्द करें: डमरू
जनपद अध्यक्ष डमरू मनहर ने बताया कि सीईओ की रिपोर्ट पर हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अब उनकी दो ही मांगें हैं, जब उनके खिलाफ मामला दर्ज हो गया तो सीईओ के खिलाफ भी दर्ज करें अन्यथा उनके और अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामले भी रद्द किए जाएं।

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