अटका है गाड़ियों को बदलने का प्रस्ताव. जीवीके कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा है, पर जिम्मेदारों ने काफी समय के बाद फाइल की जांच की। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट बनाने में देर की और केंद्र सरकार को फाइल भेजी। राज्य सरकार की आेर से देर से फाइल पहुंचने पर फंड जारी नहीं किया गया।
3 माह पहले 4 गाड़ियों को बदलने भेजा जा चुका है प्रस्ताव लेकिन अब तक नहीं मिली नई गाड़िया
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा
कंडम हो चुुकी जिले की संजीवनी एक्सप्रेस के बैकअप में भेजी गई गाड़ियां भी पुरानी है। जिले में दोरनापाल, राजनांदगांव, मुंगेली जिले में चल चुकी गाड़ियों को भेज दिया गया है। गाड़ियों को बदलने तीन महीने प्रस्ताव भेजे 3 महीने से अधिक हो गए हैं लेकिन अब तक नई गाड़ियां नहीं मिली है। पुरानी गाड़ियों में एसी खराब है तो किसी में स्टार्टिंग प्रॉब्लम भी है।
जिले में 12 संजीवनी 108 एंबुलेंस है। ये 7 साल पुरानी हो चुकी है और अब चलने लायक नहीं है। कई गाड़ियां तो तीन लाख किमी से भी अधिक चल चुकी है। दूसरे जिलों में चल चुकी पुरानी गाड़ियों को भेज दिया गया है, जिससे आपात सुविधा में मरीजों को राहत देने के बजाय जब ये गाड़ियां आधे रास्ते में खराब हो जाए तो जान आफत में पड़ जाती है। बम्हनीडीह, मालखरौदा, डभरा, नवागढ़ की गाड़ियां खराब है,जबकि पामगढ़, जांजगीर, अकलतरा, मालखरौदा और जैजैपुर में दूसरे जिले की गाड़ियां बेकअप के रूप में यहां दिया गया है। यह गाड़ियां भी पुरानी हो चुकी है। मेंटनेंस के लिए गाड़ियां आए दिन गैराज में खड़ी रहती है व आपातकाल में फोन लगाने पर लोगों को गाड़ी उपलब्ध नहीं हो पाती।
अकलतरा में दोरनापाल, मालखरौदा में पुसौर, जैजैपुर में राजनांदगांव, जांजगीर
में मुंगेली और पामगढ़ ब्लॉक में बलौदा बाजार से पासिंग गाड़ियां
मरीज को लेने गई संजीवनी स्टार्ट ही नहीं हुई
केस-1. गौद (नवागढ़) की महिला को पेटदर्द की शिकायत होने पर 6 मई को जांजगीर की संजीवनी एंबुलेंस गांव पहुंची थी। मरीज गाड़ी में बैठ गई पर गाड़ी स्टार्ट ही नहीं हुई। फिर चांपा से दूसरी संजीवनी गाड़ी को बुलाया गया तो मरीज जिला अस्पताल पहुंचा।
लेबर पेन में 45 मिनट तक तड़पती रही महिला
केस-2. आड़िल की रहने वाली संध्या पति हीरालाल को 16 मई लेबर पेन होने पर सक्ती की एंबुलेंस लेने गई थी। अस्पताल लाते समय सोंठी फाटक के पास गाड़ी रात 8 बजे बंद पड़ गई। कुरदा पीएचसी से एंबुलेंस मंगाना पड़ा। महिला 45 घंटे एंबुलेंस में रही। दूसरी गाड़ी से सक्ती सीएचसी लाया गया।
4 ब्लॉकों में पूछा, नहीं मिली संजीवनी तब बोले रहने दो
केस 3. हफ्ते भर पहले अकलतरा रोड में 1 दुर्घटना हुई थी। रात 11 बजे घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एक इंका नेता ने 108 को फोन लगाया तो वहां से नजदीकी ब्लाक की जानकारी मांगी गई तो अकलतरा, बलौदा फिर पामगढ़ के संजीवनी को 108 वालों ने स्वयं टच किया पर तीनों स्थानों पर संजीवनी नहीं मिली तो फोन लगाने वाले दूसरे वाहन की व्यवस्था की।
सीधी बात | एंबुलेंस पुरानी पर कंडिशन अचछी इसलिए चला रहे
रवि यादव, जिला प्रभारी जीवेके कंपनी 102/108 जांजगीर-चांपा
जिले में साल साल पुरानी एंबुलेंस ही चल रही है, आपातकालीन स्थिति में लोगों को गाड़ी नहीं मिलती?
चार गाड़ियां पुरानी को बदलने प्रस्ताव भेजे हैं। जिले के लिए अभी 5 गाड़ी आई भी है।
ये 5 गाड़ियां भी तो पुरानी है, एंबुलेंस मेंटनेंस के लिए गैराज में ही दिखती है तब मरीजों को ले जाने क्या करते हैं?
हां, एंबुलेंस पुरानी है लेकिन कंडीशन अच्छी है। हर 15 दिन में मेंटनेंस के लिए गाड़ी भेजी जाती है तब बेकअप रखते हैं।
ढाई लाख किमी के बाद गाड़ी बदलना था, यहां 3.50 लाख किमी चल चुकी है?
ऐसी कोई गाइड लाइन हमें कंपनी की ओर नहीं दी है।
पुरानी गाड़ी होने के चलते कभी घायल को समय में इलाज नहीं मिला तो जिम्मेदार कौन होगा?
अब तक ऐसी स्थिति नहीं हुई है। अचानक कभी एंबुलेंस बीच मंे खराब हो जाती है तो बेकअप की गाड़ी वहां लोकेशन पर भेजते हैं और मरीजों को अस्पताल तक पहुुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।