वनों में लग रही आग, जीव अौर जन्तुओं के लिए खतरा:शाक्य
भास्कर संवाददाता| मनेंद्रगढ़
जैव विविधता व वन्य जीवन के संरक्षण से ही मानव जीवन का संरक्षण संभव है। जनकपुर के वन गुरू घासीदास अारण्य से जुड़े होने के कारण जैव विविधता और वन्य प्राणियों से परिपूर्ण है। काले हिरण, चिंकारा एवं वन्य जीवों का विचरण क्षेत्र होने के कारण वनों के संरक्षण एवं संवर्धन में यह अंचल अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। वनों में लगने वाली आग ऐसे जीव-जन्तुओं के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
यह बात पर्यावरण संरक्षण जनचेतना मनेंद्रगढ़ से जनकपुर दो दिवसीय साइकिल यात्रा के समापन समारोह में चंद्रमोहन शाक्य उप वनमंडलाधिकारी ने कही। वन विभाग जनकपुर के रेस्ट हाउस में आयोजित पर्यावरण संरक्षण समारोह में स्थानीय नागरिकों सहित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए नागरिक अशोक ने कहा कि संबोधन साहित्य एवं कला परिषद् मनेंद्रगढ़ के इस अभियान से लोगों के बीच आशा की नई किरण जागी है। जनकपुर से जुड़ा जनमानस आज अपनी ही बनास नदी के प्रति चिंतित है। घटता जल स्तर मानव जीवन के लिए खतरा बन गया है। पर्यावरण के पूर्व विभागाध्यक्ष हारून मेमन ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को बिगड़ते पर्यावरण के प्रति ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। बच्चों को घरों में तुलसी और छोटे पौधों के रोपण से शुरूआत करनी चाहिए, इससे पर्यावरण संतुलित होगा। नरेंद्र अरोरा ने कहा पत्र-पत्रिकाओं एवं मीडिया सहित केंद्र और राज्य सरकारों तक पहुंचाने का भरपूर प्रयास करेगी। कार्यक्रम में जगदीश पाठक, विनोद तिवारी, श्यामसुंदर पोद्दार, पर्यावरण विभाग अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, संजय सेंगर तथा साइकिल यात्रा में पाराडोल, लेदरी, खडग़वां, मनेंद्रगढ़ से शामिल सदस्य अनिल सिंह, प्रेम सिंह, गोविंद सिंह, मोहित सिंह, सत्यनारायण, शिवम कुमार, सिद्धार्थ चटर्जी समेत अन्य उपस्थित रहे।