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11 वर्षीय पीड़िता के गर्भपात की अनुमति याचिका पर हाईकोर्ट ने 3 डॉक्टरों की पैनल से मांगी रिपोर्ट
मुंडलाराम गांव की 11 साल 8 महीने की दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति संबंधी रिट-पिटीशन पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल के दो सीनियर व एक जूनियर डॉक्टर की कमेटी बनाकर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। इसके बाद न्यायालय का फैसला आ सकता है।
पीड़िता के पिता ने रतलाम के एडवोकेट बृजेश शर्मा के मार्फत मप्र हाईकोर्ट की इंदौर हाईकोर्ट में रिट-पिटीशन लगाई है। एडवोकेट शर्मा ने बताया पीड़िता की जान को खतरा है। बड़ा सवाल यह है यदि इतनी कम उम्र में बच्चा पैदा होता है तो वह उसे कैसे पालेगी? उसे कई कठिनाइयां झेलना पड़ सकती हैं। इसलिए हाईकोर्ट से गर्भपात की अनुमति मांगी है। मंगलवार को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा बच्ची 12 साल से कम उम्र की है। इसे 27 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ भी है। इसलिए एमवाय इंदौर के दो सीनियर व एक जूनियर डॉक्टर की कमेटी बनाई जाए। कमेटी पीड़िता व गर्भ का परीक्षण करे। ओपिनियन दे कि इसमें क्या रिस्क है। यदि बच्चा पैदा होता है तो विकृत होगा अथवा नहीं। पीड़िता या गर्भ में पल रहे बच्चे की जान को कोई खतरा तो नहीं है। तीन डॉक्टरों की पैनल को इसकी रिपोर्ट 21 अप्रैल तक कोर्ट में पेश करना है। इसके बाद न्यायालय निर्णय देगा।
यह है मामला
कक्षा 6ठी में पढ़ने वाली 11 साल 8 माह की बालिका के साथ 6-7 महीने पहले सेंव लाने के बहाने घर में बुलाकर गांव के ही 52 वर्षीय बाबूलाल पाटीदार ने दुष्कर्म किया था। डर के कारण बालिका ने किसी को घटना नहीं बताई। 10 मार्च को पेट दर्द होने पर मां और दादी को शिकायत की। परिजन उसे जावरा लाए। यहां सोनोग्राफी में उसे 6-7 महीने का गर्भ होने का पता चला। इससे डॉक्टर ने रतलाम रैफर कर दिया। वहां से इंदौर रैफर कर दिया। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अभी कोर्ट में चालान पेश होना है। पिता ने पीड़िता बेटी के भविष्य और स्वास्थ से चिंतित होकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई और सुरक्षित गर्भपात की अनुमति मांगी। रतलाम की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल ओहरी का कहना है सोनोग्राफी रिपोर्ट के मुताबिक प्रसव की संभावित तारीख 16 जून है। मामला क्रिटिकल है, इसलिए इंदौर रैफर किया है।