लाभार्थी परिवार का बहुमान करते समाजजन।
भास्कर संवाददाता | जावरा
धन मिलना पुण्य है। धन का उपयोग कहां करना है यह व्यक्ति के स्वविवेक पर है। पुण्य में लगाया धन सकारात्मक परिणाम देता है। गुरु कस्तूर विहार धाम में लगाया धन पुण्य अर्जन करता है। यह धन का सदुपयोग है। हमें जीवन में माता-पिता और गुरु की निस्वार्थ भाव से सेवा करना चाहिए।
यह बात उपप्रवर्तक गौतममुनि ने राजाखेड़ी में गुरु कस्तूर विहार धाम के लोकार्पण दौरान कही। धर्मसभा को संत वैभव मुनिजी, शालिभद्रमुनिजी, महासती मधुबालाजी, श्यामाजी, सुदर्शनाजी ने संबोधित किया। अतिथि महेंद्र बोथरा (रतलाम), मनीष मारू (मंदसौर), राकेश मेहता (जावरा) का शाॅल-माला से सम्मान किया। स्वागत भाषण पंकज श्रीश्रीमाल, स्वागत गीत भावना चौरड़िया, सपना नाहटा, प्रेमलता दलाल, विभा दलाल, अनिता मारू, अंजली, बिंदिया ज्योति, प्रिया श्रीश्रीमाल ने प्रस्तुत किया। गुरु कस्तूर विहार धाम के लाभार्थी धरमचंद्र श्रीश्रीमाल का जैन दिवाकर संगठन समिति, गुरु कस्तूर पावनधाम ट्रस्ट मंडल, श्री त्रिस्तुतिक श्रीसंघ, जैन जवाहर साधुमार्गी संघ, शांतक्रांति हुक्मगच्छ, जैन श्रीसंघ बड़ावदा आदि संस्थाओं ने सम्मान किया। अभा श्री जैन दिवाकर संगठन समिति ने लाभार्थी धरमचंद्र को जैन दिवाकर श्रावक र| की उपाधि से नवाजा। अतिथियों व लाभार्थी परिवार का मनोहरलाल चपड़ौद, श्रीपाल कोचट्टा, सुरेश मेहता, पारस गादिया, राजमल खारीवाल, सुशील चपड़ोद, विनोद लुणिया ने किया। संचालन सुभाष टुकड़िया ने किया। आभार प्रकाश श्रीश्रीमाल ने माना।