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ओवरब्रिज का स्वीकृति-पत्र जारी, जीएडी साइन होते ही सबसे पहले सेतु निगम शुरू करेगा काम

3 वर्ष पहले
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लंबे इंतजार के बाद आखिर स्थानीय रेलवे फाटक की जगह ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे ब्रिज चीफ इंजीनियर ने बजट स्वीकृति का पत्र जारी कर दिया है।

दो दिन पहले पत्र रतलाम रेलवे कार्यालय पहुंचा और वहां से शुक्रवार सुबह सेतु निगम को दे दिया। जल्द संयुक्त जीएडी (जनरल असेसमेंट ड्राइंग) साइन होगी। फिर काम शुरू होगा। 1 फरवरी को ही केंद्रीय बजट में ब्रिज शामिल हो गया था लेकिन अधिकृत पत्र नहीं मिलने से रेलवे अधिकारी निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं कर रहे थे। चूंकि पत्र आ चुका है तो रेलवे अफसरों ने जीएडी की कार्रवाई शुरू कर दी। इससे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

रेलवे ने ड्राइंग-डिजाइन के लिए कार्रवाई शुरू की
सेतु निगम रतलाम के एसडीओ आर.पी. गुप्ता ने बताया रेलवे ब्रिज चीफ इंजीनियर अजय गोयल ने विभिन्न कार्यों की बजट स्वीकृति संबंधी पत्र दो दिन पहले जारी किया है। इसमें जावरा की रेलवे क्रॉसिंग नंबर 177 पर ओवरब्रिज शामिल है। केंद्रीय बजट के बाद से ही स्वीकृति की चर्चा थी लेकिन लिखित रूप से स्वीकृति की जानकारी नहीं आने के कारण असमंजस था। रेलवे की तरफ से पत्र के इंतजार में काम को गति नहीं मिल रही थी लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं है। शुक्रवार को हमने रेलवे कार्यालय में संपर्क किया तो मालूम हुआ कि स्वीकृति पत्र आने के बाद रेलवे ने ओवरब्रिज की संयुक्त ड्राइंग के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। ड्राइंग स्वीकृति के लिए डिविजनल कार्यालय भेजी है। जैसे ही जीएडी साइन होगी। सेतु निगम द्वारा रेलवे के हिस्से को छोड़कर दोनों साइडों का काम शुरू कर दिया जाएगा। रेलवे अपने हिस्से का काम बाद में करेगा।

आखिर फाटक की जगह ओवरब्रिज के लिए रेलवे ने स्वीकृति पत्र जारी कर दिया। जीएडी के बाद काम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।

मुआवजा रिपोर्ट के लिए इंतजार
सिटी-चौपाटी रोड की रेलवे फाटक की जगह जहां ब्रिज बनना है, वहां दोनों तरफ करीब 34 निर्माण प्रभावित हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी ने इन प्रभावितों का प्रारंभिक सर्वे कर गाइड लाइन अनुसार 10 करोड़ 72 लाख रुपए मुआवजा निर्धारित किया था। अब फाइनल जीएडी मिलने के बाद ही एसडीएम द्वारा मुआवजा अधिसूचना जारी की जा सकेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि जीएडी में संशोधन हुआ तो उस अनुसार प्रभावित निर्माण की नपती होगी। फिर प्रभावितों के स्वामित्व दस्तावेज अनुसार देखा जाएगा कि कितना निर्माण विधिवत है और कितना अतिक्रमण है। जो अतिक्रमण होगा, उतना मुआवजा कम हो जाएगा और जो निजी निर्माण विधिवत है, वहां का मुआवजा तय करने के बाद आवंटन की कार्रवाई की होगी। तहसीलदार राकेश सस्तिया ने बताया जैसे ही सेतु निगम फाइनल जीएडी देगा, हम उसके अनुसार मौका रिपोर्ट मंगाएंगे और मुआवजे की कार्रवाई शुरू कर देंगे। अधिसूचना जारी करते हुए दावे-आपत्ति बुलाएंगे और अवॉर्ड पारित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में 50 दिन से अधिक लगेंगे।

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