अवैध, अविकसित और अहस्तांतरित कॉलोनियों को लेकर प्रशासन के सख्त रवैये के बाद कॉलोनाइजर हरकत में आए है। पहले विधायक से मिले और फिर रतलाम पहुंचकर कलेक्टर के समक्ष नियमों में सरलीकरण व रियायत का कहा है।
कॉलोनाइजरों का कहना है जिस वर्ष कॉलोनी काटी, उसी समय के पुराने नियम व एस्टीमेट अनुसार काम करने को तैयार है। नए नियम थोंपेेंगे तो काम करना मुश्किल होगा। इसलिए नियमों का सरलीकरण करें। रियायत दें तो हम कॉलोनियों में जरूरी काम करने व इन्हें नपा में हैंडओवर करने के लिए तैयार है। अफसरों का कहना है मौजूदा नियम से काम करना होंगे। बल्कि लाइसेंस नवीनीकरण के बाद ताे रेरा एक्ट भी लागू हाेगा। हालांकि कलेक्टर ने स्थिति स्पष्ट नहीं की और कहा कि पहले कॉलोनाइजर नोटिस का जवाब दें। उसके साथ दस्तावेज व पूर्व की एनओसी प्रस्तुत करें। इनका अध्ययन करवाने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचेंगे।
नगर निवेश क्षेत्र में 81 कॉलोनियां हैं, इनमें से 16 नपा को हस्तांरित हो चुकी हैं
नगर निवेश क्षेत्र में 81 कॉलोनियां हैं। इनमें से 16 पहले से नपा में हस्तांतरित और वैध है। 8 पूर्णत: अवैध कॉलोनियों को नपा नए फार्मूले से वैध करने की तैयारी कर ली है सोमवार तक कलेक्टर आदेश पर इनके नियमितिकरण की अधिसूचना जारी हो जाएगी। इनके अलावा 9 अन्य विकसित कॉलोनियों को कुछ शर्तों के साथ नपा में हस्तांतरित करने के आदेश कलेक्टर ने तीन माह पहले दे दिए थे, केवल अमल होना है। बची हुई 48 कॉलोनियों में से 37 कॉलोनियों के कॉलोनाइजरों को हफ्तेभर पहले कलेक्टर रुचिका चौहान ने नोटिस जारी किए थे। तभी से कॉलोनाइजरों में हड़कंप है। इसी बेचैनी के चलते कॉलोनाइजर तीन दिन पहले फोरलेन स्थित एक होटल में जुटे। वहां रणनीति बनाई और दूसरे दिन विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के पास पहुंचे। विधायक ने नियमानुसार जरूरी मदद का आश्वासन दिया और कलेक्टर से चर्चा की। इसी सिलसिले में कॉलोनाइजरों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार शाम रतलाम पहुंचे और कलेक्टर एवं डूडा परियोजना अधिकारी से मिले।
कॉलोनाइजर बोले- हम तैयार, नपा साथ नहीं दे रही
कॉलोनाइजरों के प्रतिनिधि मंडल में राकेश कोचट्टा, चंद्रप्रकाश ओस्तवाल, मांगीलाल पटेल, ओम नागर आदि शामिल थे। इन्होंने कलेक्टर से कहा हम चाहते हैं कॉलोनियां हैंडओवर हो जाए लेकिन थोड़ा समय और रियायत चाहिए। जो कॉलोनियां 1985, 1990 या 2000 में काटी थी, तब नियम अलग थे। ज्यादा पुरानी कॉलोनियों के एस्टीमेट में अर्थवर्क के रोड थे। कॉलोनाइजरों ने जो प्लॉट बेचे उनकी कीमत कम थी। अब वहां की गाइड लाइन बढ़ी इसका फायदा कॉलोनाइजरों को नहीं मिला। जिस समय की विकास अनुमति थी, उसी अनुसार काम करने को तैयार है। नए नियम थोपने पर संभव नहीं। कई कॉलोनाइजरों ने पुराने नियम से काम पूरे कर दिए। ईदगाह रोड स्थित एक कॉलोनी समेत कुछ कॉलोनियों में कार्यपूर्णता की एनओसी हैं, फिर भी नपा ने इन्हें हैंडओवर नहीं किया। कॉटजूनगर हैंडओवर हो गई थी लेकिन नपा ने ग्रामीण सीमा में बताकर प्रस्ताव निरस्त कर दिया, जो गलत है। जवाहर नगर कॉलोनी में 17 साल पहले विकास कार्य के पैसे नपा ने जमा करवा लिए लेकिन काम नहीं किया। ऐसे कई आवेदन लंबित है लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन पर विचार नहीं किया। कॉलोनाइजरों ने कहा रेरा (रीयल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) 1 मई 2017 से लागू हुआ है तो इसके नियम पुरानी कॉलोनियों पर लागू करने का क्या औचित्य है। कॉलोनाइजरों का पक्ष सुनने के बाद कलेक्टर चौहान ने कहा कि पहले सभी कॉलोनाइजर अपने-अपने नोटिसों का जवाब दें।
3 साल में काम करवाने थे
डूडा परियोजना अधिकारी एस. कुमार, नपा सीएमओ एपीएस गहरवार का कहना है नियमों के अनुसार तो जिस वर्ष विकास अनुमति जारी की, उससे तीन साल के दरमियान विकास कार्य करवाना जरूरी है। जैसे वर्ष 1985 में कॉलोनी कटी तो 1988 तक काम पूरे करना थे। विशेष स्थिति में यह समय सीमा पांच साल हो सकती है। इससे अधिक नहीं। यहां कॉलोनाइजरों ने सालों से काम नहीं किए। पुराने लाइसेंस की अवधि खत्म हो गई। अब उन्हें रेरा के तहत पंजीयन करवाने के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण करवाना होगा। जब लाइसेंस मौजूदा गाइड लाइन से बनेंगे तो काम भी मौजूदा नियमों से ही करवाना होंगे। फिर भी यदि पुरानी किसी कॉलोनी के विकास कार्य पूर्ण करने संबंधी कोई प्रमाण-पत्र कॉलोनाइजरों के पास है तो वे उपलब्ध करवाएं। उन्हें छूट मिल सकती है। पहले दस्तावेज दिखाएं, फिर नियमानुसार रियायत मिलेगी। मौखिक कहने मात्र से कुछ नहीं होगा।