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2800 पे-ग्रेड के लिए पटवारियों ने 37 अतिरिक्त हल्कों का काम बंद किया

3 वर्ष पहले
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प्रांतीय आव्हान पर सभी पटवारियों ने वेतनमान बढ़ाने और तकनीकी पद घोषित करवाने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। पटवारियों की पे-ग्रेड 2100 है, इसे बढ़ाकर 2800 करने की मांग है। ये मांग पूरी नहीं होने पर शुक्रवार दोपहर पटवारियों ने राजस्व निरीक्षक कार्यालय से तहसील तक रैली निकाली। नारेबाजी की और फिर तहसीलदार राकेश सस्तिया को अतिरिक्त 37 हल्कों का चार्ज व बस्ते जमा करवा दिए। जावरा ब्लॉक में कुल 70 हल्के और 33 पटवारी पदस्थ है। सभी के पास अतिरिक्त हल्कों का प्रभार था लेकिन ये काम शुक्रवार से बंद कर दिया। अब हड़ताल खत्म होने तक इन हल्कों के 85 से अधिक गांवों में काम प्रभावित होगा। किसान व अन्य लोग परेशान होंगे।

पटवारियों ने जिन 33 मूल हल्कों का चार्ज अपने पास रखा है, उनमें केवल भू-अभिलेख संबंधी काम करेंगे। राजस्व संबंधी बाकी काम व अन्य ड्यूटी पर नहीं जाएंगे। कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर मौजूद रहेंगे। पटवारी संघ सचिव दिनेश पाटीदार ने बताया प्रदेशभर में पटवारी चरणबद्ध आंदोलन कर रहे है। पहले चरण में हर जिला मुख्यालय पर ज्ञापन दिया। दूसरे चरण में 16 मई को भोपाल में रैली निकाली। अब तीसरे चरण में अतिरिक्त हल्कों काम छोड़ा है। साथ ही सोशल मीडिया पर सरकारी जितने ग्रुप है उनसे लेफ्ट हो गए। 31 मई तक मूल हल्कों का ही काम करेंगे। इसके बाद 1 से 15 जून तक सभी पटवारी अर्जित अवकाश पर रहेंगे।

पटवारियों ने अतिरिक्त हल्कों का चार्ज व बस्ते तहसीलदार को सौंप दिए।

पटवारियों की हड़ताल से ये काम होंगे प्रभावित

कुल 70 हल्कों के अंतर्गत 147 गांव सम्मिलित हैं। इनमें से 37 हल्कों के 85 गांव में सारे काम ठप रहेंगे, क्योंकि ये बस्ते शुक्रवार को पटवारियों ने जमा कर दिए। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, खाता-खसरा अपडेट करने से लेकर मौका पंचनामा रिपोर्ट आदि शामिल है जो बंद रहेंगे। बाकी 33 मूल हल्कों के अंतर्गत आने वाले गांवों व शहर में केवल भू-अभिलेख संबंधी काम होंगे। चुनावी ड्यूटी, लाॅ एंड ऑर्डर समेत अन्य जरूरी काम भी पटवारी नहीं करेंगे। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सही से नहीं होगा। सबसे ज्यादा सीमांकन प्रभावित होगा। सीमांकन के लिए 15 जून आखिरी तारीख रहती है। इसके बाद बारिश शुरू होने से सीमांकन नहीं हो पाते लेकिन इस बीच पटवारी हड़ताल पर रहेंगे। इससे सीमांकन के सारे प्रकरण लंबित रह जाएंगे। ऐसे में किसान व अन्य जमीन खरीदार परेशान होंगे और मौके पर विवाद की स्थितियां निर्मित होगी। तहसीलदार सस्तिया ने बताया प्रांत स्तरीय हड़ताल है। ऐसे में दिक्कत होगी। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करवाएंगे।

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