संविधान की मूल भावना को बनाए रखें: मिंज
भारत र| डॉ. भीमराव अंबेडकर की 127 वीं जयंती पर रणजीता स्टेडियम में जिले भर से सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे। जिलेवासियों ने जय भीम के नारे लगाते हुए बाबा भीम राव को दुग्ध स्नान करा कर उनकी पूजा अर्चना की।
कार्यक्रम का आयोजन अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ावर्ग संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में किया गया था। समारोह के मुख्य अतिथि जिले के ट्रेजरी आफिसर एडमोन मिंज, विशिष्ट अतिथि सांसद रणविजय सिंह जूदेव ने शहर में अंबेडकर भवन के निर्माण के लिए सांसद निधि से 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। आम सभा को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मिंज ने कहा कि डॉ. भीम राव अंबेडकर सहित भारतीय संविधान निर्माण समिति ने देश की जरूरत और यहां के लोगों की आवश्यकता के अनुरूप संविधान का निर्माण किया था, लेकिन इसमें छेड़छाड़ की जो कोशिश हो रही है, उससे पूरा देश प्रभावित हो रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डीडीसी कृपा शंकर भगत ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने देश के शोषित और दबे कुचले लोगों के अधिकार और सम्मान के लिये ताउम्र संघर्ष किया। भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान उन्होंने देश और समाज के सभी लोगों के प्रति समान भावना से काम किया। संवैधानिक व्यवस्था से जो छेड़छाड़ करने का प्रयास हो रहा है, उससे पूरे देश में संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई। हम सब को बाबा साहब द्वारा निर्मित भारत के संविधान में पूरा विश्वास बनाए रखना है। संविधान और कानून के दायरे में रह कर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ वर्ग के लोगों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई को जारी रखी जाएगी। विशिष्ट अतिथि सांसद रणविजय सिंह जूदेव कहा कि डॉ. भीम राव अंबेडकर कानून के महान ज्ञाता थे। उनके इस विद्ववता को देखते हुए आजादी के बाद भारत का संविधान तैयार करने वाली समिति में उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया था। और उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
वहीं जिले के आठों विकास खण्ड से जुटे सैकड़ों लोगों ने जय भीम और डॉ. भीम राव अंबेडकर अमर रहे का नारा लगाते हुए रैली निकाली। रैली रणजीता स्टेडियम से रवाना होकर बाला साहेब देशपांडे बाल उद्यान, पुरानी टोली, गायत्री मंदिर, बस स्टैंड, महाराजा चौक, जय स्तंभ चौक होते हुए वापस रणजीता स्टेडियम पहुंच कर सभा में तब्दील हो गई। उन्होंने कहा कि देश को एकता के सूत्र में पिरोए रखने के लिये संविधान की मूल भावना को अक्षुण्ण बनाए रखना बेहद आवश्यक है।