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साल में दो माह खुलने वाले स्वीमिंग पूल पर ढ़ाई लाख का बिजली कर्ज

3 वर्ष पहले
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जिले में एक भी तैराक नहीं जो राज्य स्तर पर पर अपना जौहर दिखा सके। प्रतिभा को निखारने के लिए जिला मुख्यालय में की 50 लाख रुपए की लागत से स्वीमिंग पूल तो बना दिया गया, लेकिन वह भी विभागीय उदासीनता के कारण लोगों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। वहीं ढाई लाख के करीब बिजली बिल का भुगतान नहीं हो ने के कारण बंद कर दिया गया है।

स्वीमिंग पूल के रखरखाव की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को दी गई थी, साल भर तक ठीक चलता रहा, इसके बाद अचानक स्वीमिंग पूल के पंप में खराबी आने के बाद बाहर से मेकेनिक लाकर बनवाया गया था उसके बाद से अब तक ना तो स्वीमिंग पुल खुला और ना ही उसका मेंटनेंस हो पाया है। ढ़ाई लाख के करीब बिजली बिल का भुगतान नहीं हो ने के कारण यह सुविधा नगर के नागरिकों को नहीं मिल पा रही है। स्वीमिंग पूल सार भर में मात्र 2 माह ही खुलता है। इस दौरान कोई खराबी आ जाए तो अचानक बंद भी कर दिया जाता है। जिले का एक मात्र स्वीमिंग पुल इन दिनों बंद है। हर साल खेल विभाग द्वारा तैराकी प्रतियोगिता कराती है, लेकिन जिले में अब तक कोई ऐसा तैराकी खिलाड़ी सामने नहीं आया है जो कि तैराकी में अपने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में शामिल हुआ हो।

ऐसे में लोगों के स्वीमिंग पूल अनुपयोगी होते जा रहा है, जो केवल शो-पीस बनकर रह गया है। साफ तौर पर यह कहा जा सकता है कि जिले में तैराकी खिलाड़ी तैयार करने की ललक जशपुर जिले के किसी भी पीटीआई व खेल विभाग द्वारा नहीं दिखाई दे रही हैं।

शुरू होने के एक माह बाद ही आ गई थी खराबी- अप्रैल 2015 में लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तरन ताल का उद्घाटन किए थे। महज कुछ दिनों में ही डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा। वहीं कई लोगों ने अपने बच्चों को तैराकी सीखाने के लिए भी उनका रजिस्ट्रेशन कराया। अचानक वहां लगा फिल्टर मशीन ही खराब हो गया था। जिसके बाद तरणताल को बंद करना पड़ा। इसके सुधार के लिए बाहर से मैकेनिक बुलवाकर उसका सुधार कार्य करवाया गया।

Rs.50 लाख की लागत से बने स्वीमिंग पूल का लाेग नहीं कर पा रहे उपयोग
भास्कर न्यूज | जशपुरनगर

जिले में एक भी तैराक नहीं जो राज्य स्तर पर पर अपना जौहर दिखा सके। प्रतिभा को निखारने के लिए जिला मुख्यालय में की 50 लाख रुपए की लागत से स्वीमिंग पूल तो बना दिया गया, लेकिन वह भी विभागीय उदासीनता के कारण लोगों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। वहीं ढाई लाख के करीब बिजली बिल का भुगतान नहीं हो ने के कारण बंद कर दिया गया है।

स्वीमिंग पूल के रखरखाव की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को दी गई थी, साल भर तक ठीक चलता रहा, इसके बाद अचानक स्वीमिंग पूल के पंप में खराबी आने के बाद बाहर से मेकेनिक लाकर बनवाया गया था उसके बाद से अब तक ना तो स्वीमिंग पुल खुला और ना ही उसका मेंटनेंस हो पाया है। ढ़ाई लाख के करीब बिजली बिल का भुगतान नहीं हो ने के कारण यह सुविधा नगर के नागरिकों को नहीं मिल पा रही है। स्वीमिंग पूल सार भर में मात्र 2 माह ही खुलता है। इस दौरान कोई खराबी आ जाए तो अचानक बंद भी कर दिया जाता है। जिले का एक मात्र स्वीमिंग पुल इन दिनों बंद है। हर साल खेल विभाग द्वारा तैराकी प्रतियोगिता कराती है, लेकिन जिले में अब तक कोई ऐसा तैराकी खिलाड़ी सामने नहीं आया है जो कि तैराकी में अपने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में शामिल हुआ हो।

ऐसे में लोगों के स्वीमिंग पूल अनुपयोगी होते जा रहा है, जो केवल शो-पीस बनकर रह गया है। साफ तौर पर यह कहा जा सकता है कि जिले में तैराकी खिलाड़ी तैयार करने की ललक जशपुर जिले के किसी भी पीटीआई व खेल विभाग द्वारा नहीं दिखाई दे रही हैं।

शुरू होने के एक माह बाद ही आ गई थी खराबी- अप्रैल 2015 में लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तरन ताल का उद्घाटन किए थे। महज कुछ दिनों में ही डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा। वहीं कई लोगों ने अपने बच्चों को तैराकी सीखाने के लिए भी उनका रजिस्ट्रेशन कराया। अचानक वहां लगा फिल्टर मशीन ही खराब हो गया था। जिसके बाद तरणताल को बंद करना पड़ा। इसके सुधार के लिए बाहर से मैकेनिक बुलवाकर उसका सुधार कार्य करवाया गया।

बिजली बिल जमा नहीं होने कारण तरन ताल शुरू नहीं कर पा रहे है, बिजली बिल के लिए फंड में रकम नहीं होने के कारण बिल नहीं पटाया जा सकता है। उच्च विभाग से राशि की मांग कर स्वीमिंग पूल को जल्दी से जल्दी चालू कराया जाएगा। \\\'\\\' एन कुजूर, डीईओ, जशपुर

फीस साल भर की उपयोग मात्र 2 माह
अप्रैल से मई इन दो महीने में शहर के अधिकांश तैराक यहां आते हैं, लेकिन साल में दस माह बंद रहने के कारण हर साल तैराकों की संख्या घटती ही जा रही है। जब तरन ताल शुरू हुआ था तो उस साल की गर्मी में सैकड़ों की संख्या में हर उम्र के तैराकी में रूचि रखने वाले रोजना सुबह-शाम आते थे। साथ ही बड़ी संख्या में यहां तैराकी सीखने भी लोग और बच्चे आते थे, लेकिन अब चार सालों से लगातार इसकी संख्या में कमी आ रही है। जबकि तैराकों से साल भर की फीस लेते हैं। लेकिन उन्हें तैराकी का मजा सिर्फ दो माह ही मिल पाता है। सदस्यता अभियान और मेंटनेंस के लिए पहले जिला स्तर पर बैठक हुई और समिति भी गठित की गई, लेकिन अब समिति की लगभग तीन साल से कोई बैठक नहीं हुई है और न ही किसी नियमों का पालन किया जा रहा है। प्रारंभिक दौर में ही सारे नियम कानून दरकिनार कर दिए गए।

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