पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • तीन स्तरीय समिति रोकेगी शुभ मुहूर्त पर बाल विवाह, निगरानी करेगी समिति

तीन स्तरीय समिति रोकेगी शुभ मुहूर्त पर बाल विवाह, निगरानी करेगी समिति

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में जिले भर में शादियां होगी। इन शादियों में बाल विवाह रोकने के लिए महिला बाल विकास विभाग ने तीन स्तरीय टीम बनाकर बाल विवाह रोकेगी।

महिला सशक्तिकरण में बाल विवाह रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। बाल विवाह रोकने के लिए सभी की जिम्मेदारी तय करने को लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं राजस्व विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर विशेष नजर रखी जाएगी। अगर इन सेवादाताओं को कहीं बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो वह प्रशासन को बताए और ऐसे विवाह में अपना सहयोग न दें।

बाल विवाह रोकने के लिए समिति बनाई

बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रशासन ने सख्त निगरानी बैठाई है। बाल विवाह रुकवाने के लिए तीन स्तरीय समिति का गठन किया गया है। जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी हैं। विकासखंड स्तरीय समिति में एसडीएम की टीम है और गांव की टीम में गांव में पंच, सरपंच, आंबा कार्यकर्ता व नगरीय क्षेत्रों में पार्षद व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के मामलों में निगरानी के लिए तैनात किया गया है। जिले में अब तक रुकवाई गई शादियों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा चाइल्ड लाइन संस्था और पुलिस भी बाल विवाह के विरुद्ध महिला एवं बाल विवाह विभाग के साथ कार्रवाई कर रही है।

इस नंबर पर दें सूचना

यदि आपके आसपास बाल विवाह हो तो ऐसे शादियों को रोकने के लिए समाज जागरुक हो तभी नाबालिगों की शादी रूक सकती है, हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह ऐसी सूचना इन नंबरो पर दे उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। महिला हेल्पलाइन नंबर - 181 चाइल्ड लाइन नंबर 1098 जिला बाल संरक्षण अधिकारी 7489888808

जानिए बाल विवाह में क्या है सजा

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत सजा के कड़े प्रावधान हैं। मामला सिद्ध होने पर दुल्हा-दुल्हन, उनके माता-पिता सहित विवाह में शामिल सभी लोगों को सजा हो सकती है। यहां तक की बाराती वाहन के चालक, फोटोग्राफर, लाइट डेकोरेशन, बैंड बाजा वाले भी सजा के दायरे में आ जाते हैं। बाल विवाह के मामलों में दो वर्ष सश्रम कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।

प्रत्येक िवकासखंड के लिए टीम बनाए गए हैं, आइसीपीएस और परियोजना से सीडीपीओ और पर्यवेक्षक चाइल्ड लाईन रहेगें। जो कि प्रत्येक विकासखंड में बाल विवाह न हो इसे सुनिश्चित करेगी।\\\'\\\' नेहा राठिया, जिला महिला बाल विकास अधिकारी, जशपुर

खबरें और भी हैं...