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प्लस-टू में अकाउंट-अर्थशास्त्र का कोर्स बदलेगा

3 वर्ष पहले
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11वीं और 12वीं के इकोनॉमिक्स और अकाउंटेंसी के सिलेबस में सीबीएसई ने बदलाव किया है। सभी बोर्ड में कॉमन कोर्स करने के लिए ऐसा किया है। कोर्स का आधा हिस्सा 12वीं में और आधा हिस्सा 11वीं में कर दिया है। अकाउंटेंसी में नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन को 11वीं से हटाकर 12वीं में कर दिया गया है।

12वीं के स्टूडेंट्स पर सिलेबस का भार न बढ़े, इसके लिए 12वीं से कंजर्वेशन के टॉपिक्स हटा दिए गए हैं। जो नए सेशन से लागू होगा।

नए सिलेबस के अनुसार माइक्रो इकोनॉमिक्स को 11वीं के सिलेबस में शामिल कर लिया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था टॉपिक को 11वीं से 12वीं में शिफ्ट कर दिया गया है। माइक्रो के बिना मैक्रो समझ नहीं आएगा। ऐसे में विद्यार्थी को टॉपिक समझने में दिक्कत होगी। वहीं, 11वीं में हिस्ट्री ऑफ कॉमर्स में कुछ टॉपिक्स को शामिल किया है।

बायोलॉजी में भी किए गए बदलाव, पहले 26, अब होंगे 27 सवाल- बायो में वैल्यू वाले सवालों को हटा दिया गया है। यानी प्रश्न पेपर पैटर्न को बदला गया है। पहले 26 सवाल आते थे अब 27 कर दिए गए हैं। पहले 70 अंक का पेपर होता था, जिसे अब 73 अंक का कर दिया गया है। प्रश्न पेपर के पैटर्न के हिसाब से कैलकुलेशन मिसमैच है। सीबीएसई इसमें फिर से बदलाव कर सकता है।

11वीं में इस टॉपिक को नहीं पढ़ाते थे

असल में नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन ज्यादा महत्वपूर्ण टॉपिक है। 11वीं में कई स्कूल इस टॉपिक को पढ़ाते नहीं थे, जबकि विशेषज्ञ के अनुसार यह टॉपिक पढ़ाना चाहिए। होम एग्जाम होने के कारण इन टॉपिक को हल्के में लिया जाता था, जबकि इंडियन इकोनॉमिक्स में नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन का महत्वपूर्ण कंट्रीब्यूशन है। स्टूडेंट्स के लिए इस कंट्रीब्यूशन को समझना जरूरी माना जाता है।

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