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तमाम अतिक्रमण, धर्मांतरण के बाद भी उरांव समाज की परंपरा कायम: जगदेव

3 वर्ष पहले
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सिर पर पगड़ी बांधकर शोभा यात्रा निकालते समाज के लोग।

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर

शहर के नजदीक तेतरटोली स्थित सिनगी देई कैली देई भवन में शनिवार को 7 दिवसीय उरांव महिला सम्मेलन का समापन हुआ। इस मौके पर उरांव महिलाओं ने सिर पर पगड़ी बांधकर शोभा यात्रा निकाली।

सभा में वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदेव राम ने कहा कि तमाम अतिक्रमण और धर्मांतरण के बावजूद भी उरांव समाज ने अपनी परंपरा कायम रखी है, जो महत्वपूर्ण है। शोभा यात्रा में शामिल होने के लिए जिले के साथ सरगुजा, झारखंड और ओडिशा से बड़ी संख्या में उरांव समाज के सदस्य जशपुर पहुंचे। सम्मेलन के दौरान समाज के प्रमुखों ने उरांव समाज की रीति-रिवाज, परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के साथ समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया गया। सम्मेलन में मानव तस्करी, गौ तस्करी, नक्सल समस्या जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए उरांव समाज के मुखिया सामाजिक भवन में रात गुजारते हुए पारम्परिक नृत्य और संगीत के साथ अपने समाज के विकास पर मंथन करते रहे। शनिवार के समापन मौके पर निकली शोभा यात्रा तेतरटोली से होकर शहर के महाराजा चौक, सन्ना रोड, बिरसा मुंडा चौक, जैन मंदिर, बस स्टैंड होते हुए वापस तेतरटोली पहुंची। जहां सभा का आयोजन हुआ। पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत ने कहा कि महिलाओं ने यह साबित किया कि वे घर के साथ समाज को भी अच्छी तरह से संभाल सकती हैं। उन्होंने कहा कि समाज के रीति रिवाज और परंपराओं पर सात दिनों तक चर्चा चली और नई नई बाते सामने आई हैं। इससे नई पीढ़ी को सीखने का अवसर मिला। नई पीढ़ी हमारे सनातन संस्कृति के बारे में जानेगा, समझेगा और धर्मांतरण की ओर नहीं जाएगा। रामप्रकाश पांडेय ने कहा कि रोहताशगढ़ के बाद जशपुर का यह भवन उरांव समाज के लिए तीर्थ के रूप में सामने आ रहा है। यहां समाज के लोग एकजुट होकर जो चीज विलुप्त हो रही हैं उसे भी सामने लाकर समाज के लोगों को बताते हैं, जिससे समाज के लोगों को सीखने का मौका मिल रहा है।

समाज

कार्यक्रम कै दैरान क्षेत्र से आए समाज की महिलाएं व अन्य।

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