सोनू को सरगुजा पिंगला नदी के किनारे रेस्क्यू सेंटर में रखने की तैयारी
बिलासपुर के अचानकमार टाइगर रिजर्व के फारेस्ट जोन बिंदावल से सोनू हाथी को सरगुजा लाने की तैयारी है। 3 साल पहले वन विभाग ने उसे पकड़ा और तब से उसे वहीं रखा था।
उसे जंजीरों में कैद रखने का मामला सामने आने के बाद कुछ वन्यप्रेमी कोर्ट गए और वहां से सोनू को हाथियों के प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में छोड़ने का आदेश दिया था। रहवास के हिसाब से कहीं व्यवस्था नहीं होने से उसे वहां से नहीं हटाया जा सका था। इधर सूरजपुर जिले के पिंगला नदी के किनारे एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर तैयार होने के बाद उसे लाने की तैयारी शुरू हो गई है। सोनू को यहां लाने के बाद इसी सेंटर में रखा जाएगा। हफ्तेभर में उसे यहां लाने की उम्मीद है। सरगुजा रेंज के सीसीएफ केके बिसेन ने बताया मामला कोर्ट से जुड़ा हुआ है इसलिए हाथी के रहवास से लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। विशेष वाहन से उसे यहां लाया जाएगा।
उसके साथ महावत भी आएंगे जो उसकी देखरेख करेंगे। गौरतलब है कि वन विभाग उसे अचानकमार में ही शिफ्ट करना चाहता था। वहां रेस्क्यू सेंटर तैयार करने करीब दो करोड़ व मेंटेनेंस के लिए सालाना 19 लाख मांगे गए थे पर कोर्ट ने कहा था कि इसमें सौ साल लग जाएंगे। अचानकमार हाथियों के लिए उपयुक्त नहीं है इसलिए सोनू को हाथियों के रहवास क्षेत्र में रखा जाए, जहां हाथियों का आना-जाना हो। ऐसा आदेश इसलिए दिया गया था कि वह हाथियों के साथ घुल मिल जाए और उनके साथ लौट जाए। यहां पिंगला नदी के किनारे तैयार किए प्रदेश के पहले एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर को इसके लिए बेहतर माना है।
हाथियों के रहवास व प्रशिक्षण के हिसाब से सेंटर सहित जरूरी सुविधाएं तैयार की गई हैं इसलिए उसे यहां लाया जा रहा है। इस इलाके में 38 हाथियों का दल दो सालों से घूम रहा है। खास बात यह है कि इस दल ने कोई नुकसान नहीं पहंुचाया है। वन विभाग को उम्मीद है कि सोनू यहां के वातावरण में ढल जाएगा।
बचाव
सोनू हाथी को तीन साल पहले पकड़ा था, तब से अचानकमार में ही है, हाथियों के प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में रखने कोर्ट के आदेश
सूरजपुर जिले के तैमोर पिंगला से लगे एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा
कर्नाटक के कुमकी हाथियों को लाने में हो रहा विलंब
इधर कर्नाटक के प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को यहां लाने में विलंब हो रहा है। अभी दल के पांच हाथी जो वहां से लाए गए हैं उन्हें महासमुंद में रखा गया है। वहां उत्पाती हाथियों पर नियंत्रण के बाद हाथियों को यहां लाया जाएगा। वहां अभी तक अभियान शुरू नहीं हुआ क्योंकि हाथी दिखाई नहीं दे रहे हैं।
साेनू को इसलिए ला रहे क्योंकि प्रदेश में ज्यादा सरगुजा में उत्पाती हाथी
90 के दशक में पड़ोसी राज्यों ओड़ीसा और झारखंड से आने वाले हाथियों ने यहां स्थाई डेरा जमा लिया है और ये हाथी अब यहीं के होकर रह गए हैं। प्रदेश में सबसे अधिक हाथीं सरगुजा और इससे लगे सूरजपुर से लेकर जशपुर जिले तक घूम रहे हैं। अलग-अलग दल में सौ से अधिक हाथी यहां भटक रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सोनू को यहां लाया जा रहा है।