इस साल रोजा साढ़े पंद्रह घंटे का होगा
अलग-अलग जगहों के हिसाब से समय हो सकता है बदलाव।
भास्कर न्यूज | जशपुरनगर
इस बार रोजेदारों को सब्र का इम्तिहान कुछ ज्यादा ही देना पड़ेगा। इस बार के रमजान माह में रोजे तकरीबन 15 घंटे के होंगे। लगातार दूसरे वर्ष मई में रोजा का महीना शुरू हो रहा है। आज से रोजे शुरू हो जाएंगे और 16 जून को ईद का जश्न मनाया जाएगा। जानकारों के मुताबिक अलग-अलग जगहों के हिसाब से समय में कुछ बदलाव हो सकता है।
शब-ए-बरात के बाद रमजान की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक इस साल रोजे साढ़े 15 घंटे से ज्यादा के होंगे। पहले रोजे के सहरी का समय सुबह 3.43 तथा इफ्तार शाम 6.31 पर खोला जाएगा। इसी तरह आखिरी रोजे की सहरी का समय भोर में 3.34 मिनट और इफ्तार शाम को छह.44 मिनट पर होगा। इस बार भी भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच रोजे की शुरुआत होगी। खुदा की इबादत करने वाले गर्मी के कारण रोजे नहीं छोड़ेंगे।
साल में 10 दिन हो जाता है कम- इस्लामी कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर में एक साल में 10 दिन का अंतर आता है। यह अंतर इसलिए आता है कि इस्लामी कैलेंडर में 29-30 दिन का महीना होता है, वहीं अंग्रेजी कैलेंडर में 30-31 दिन का महीना होता है।
आज से शुरू होगा रमजान का पवित्र महीना, 16 जून को ईद का जश्न संभावित
रमजान नेकी कमाने का महीना
मौलाना मंसूर ने बताया कि रमजान इस्लामिक साल का 9वां महीना है। यह महीना अल्लाह का है। जो इस महीने में अल्लाह के हुक्म का पालन करता है उससे उसका सीधा रिश्ता जुड़ जाता है। रमजान का यह मुबारक महीना जिस इंसान को मिला वे खुशनसीब और किस्मत वाले हैं। यह महीना नेकी कमाने और बुराइयों से बचने का है। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। रोजा रखें, नमाज पढ़े, कुरआन ए पाक की तिलावत करें।
शरीर के लिए फायदेमंद
रमजान के पाक महीने में रोजा रखना मुसलमानों का फर्ज माना गया है, पर ये तो धार्मिक कारण है। इससे इतर कई विद्वान व चिकित्सक एक माह के इस रोजे के पीछे वैज्ञानिक कारण भी मानते हैं। पूरे वर्ष में एक माह का फास्टिंग शरीर के लिए कई मायने में फायदेमंद होता है। इस दरमियानी प्रोटीन और यूरिक एसिड भी नार्मल हो जाता है। इससे शरीर मानसिक रूप से तनाव मुक्त हो जाता है। चिकित्सकों की मानें तो चावल, आलू आदि के खाने से शरीर में स्टार्च की मात्रा बढ़ता है। एक माह में तक नियंत्रित सेवन से शरीर में दरम्यान स्फूर्ति बरकरार रहता है। रोजा के दिनों में जमा फैट का उपयोग शरीर द्वारा किया जाता है।