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बेटी बचाने का संदेश देने साेमनाथ से नेपाल तक की साइकिल यात्रा कर रही सुनीता, जशपुर पहुंची

3 वर्ष पहले
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बेटियों का समाज में सम्मानजनक स्थान है। कोई बेटी यदि मजबूत इरादों के साथ समाज में कुछ नया करे तो पूरा समाज उसका साथ देता है। मैने इस यात्रा से पहले भी 5000 किलोमीटर की यात्रा साइकिल पर अकेले ही तय की है। ना कभी मुझे गुंडे बदमाशों का सामना करना पड़ा है और ना ही और कोई ऐसी स्थिति निर्मित हुई है जिससे मैं डरूं। मैं जहां भी पहुंची हूं, वहां मुझे खूब सम्मान व शाबासी मिली है।

यह बातें सुनीता सिंह चौकन ने भास्कर से हुई खास बातचीत में कही। सुनीता सिंह चौकन हरियाणा सरकार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर है। सुनीता अपने मजबूत इरादों के साथ वर्तमान में सोमनाथ से नेपाल तक की साइकिल यात्रा में निकली है। यात्रा के दौरान वह हर जगह बेटियों को बचाने व उन्हें पढ़ाने का संदेश दे रही है।

मंगलवार को हाइवे पर पतराटोली के पास साइकिल पर मिली सुनीता ने बताया कि वह पूरी यात्रा अकेले ही करती है। चाहे कड़ी धूप हो या फिर बदन को चीरने का अहसास कराने वाली ठंडी शीतलहर। चाहे बारिश हो या आंधी। उसकी यात्रा कभी नहीं रुकती है। सुनीता ने कहा कि वह देश के कई हिस्सों में अब तक जा चुकी है। इस यात्रा से पहले उसने कन्याकुमारी से पारतुंगा की 5000 किलोमीटर की यात्रा की थी। इस यात्रा में अलग-अलग राज्य मिले अलग कल्चर व भाषा के लोग मिले। सुनीता ने कहा कि सुने रास्ते से लेकर जंगल व पहाड़ी के रास्तों को भी वह हमेशा अकेले ही तय करती है, पर आज तक कभी भी कोई ऐसी स्थिति निर्मित नहीं हुई है कि किसी ने उसे परेशान किया या फिर कोई गलत हरकत की।

हरियाणा सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसेडर है सुनीता सिंह चौकन

माउंट एवरेस्ट की चोटी पर फहराया है तिरंगा

सुनीता देश की उन बेटियों में से है, जिसने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर देश का झंडा गाड़कर देश का गौरव बढ़ाया है। सुनीता ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया था। नेपाल तक की यात्रा के बाद संभावना है कि उसे भारत सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में देश का ब्रांड एंबेसडर बनाए।

केरसई स्कूल में शिक्षक और बच्चों ने किया उनका सम्मान

सुनीता जब केरसई प्राथमिक शाला अपना संदेश लेकर पहुंची तो यहां के शिक्षक व बच्चों ने सुनीता का सम्मान किया। सुनीता ने बच्चों के साथ बातें की और बच्चों का हौसला बढ़ाया। साथ ही सुनीता के आने की यादगार में स्कूल प्रबंधन ने यहां सुनीता के हाथों एक पौधा भी लगवाया। स्थानीय लोगों का अपना देख सुनीता भावविभोर हो गई।

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