देवबोरा स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन जर्जर हो गया। कई बार मांग करने के बाद भी जब भवन की मरम्मत नहीं कराया गया तो ग्रामीणों ने भवन को खतरनाक घोषितकर उसमें ताला लगा दिया अब एएनएम के घर में ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
वर्ष 2006-07 में करीब 5 लाख की लागत से उप स्वास्थ केन्द्र के भवन का निर्माण कराया गया था। 12 साल में यह भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता और क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि इस केन्द्र में 6 गांव के करीब 4 हजार इलाज के लिए आश्रित हैं। इसके भवन की छत जर्जर हो चुकी है। कई बार रिपेयरिंग की मांग की गई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस केन्द्र में 6 गांव सेमरकोना, पंडरी, मयाली,जाेकारी, देवबोरा के करीब 4 हजार ग्रामीण इलाज के लिए आते हैं। प्रतिदिन 40-50 ग्रामीणों का उपचार होता है।
मरम्मत नहीं होने से 12 साल में ही भवन हो गया अनुपयोगी
पेड़ गिरने से हुआ ज्यादा नुकसान
सीएमओ डा. राज लल्लन तिवारी ने बताया कि पिछले साल पेड़ गिरने से भवन के छत और दरवाजा काे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि देख रेख के अभाव में भवन ज्यादा जर्जर हो गया है। इसकी रिपेयरिंग की मांग अक्टूबर 17 में मिशन संचालक से की गई है, लेकिन अब तक फंड नहीं मिलने से दोबारा पत्र भेजकर फंड मांगा गया है।
3 कर्मचारियों की ड्यूटी एक गांव में
देवबोरा के उप स्वास्थ्य केन्द्र में एक एएनएम व दो अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना है,परंतु भवन के अभाव में एक एएनएम को छोड़कर दो कर्मचारी बाहर निवास करते हैं और प्रतिदिन बाहर से आना जाना करते हैं। इनके लिए भी भवन की व्यवस्था की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कर्मचारी यदि गांव में रहेगें तो उन्हें रात में भी स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सकेगा। ग्रामीणों ने बताया कि भवन की खतरनाक स्थिति को देखते हुए कोई भी यहां इलाज कराना पसंद नहीं करता था। इस कारण दरवाजा विहीन इस भवन को टीन लगाकर बंद कर दिया गया। इसके कारण एएनएम अब मरीजों का अपने घर में ही इलाज करती है। प्रतिमाह औसतन 2 डिलीवरी वह अपने घर पर ही करा रही है। आकस्मिक स्थिति में मरीजों को उपचार के लिए बाहर भेज दिया जाता है।