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50 युवकों की टीम नदी के उद््गम स्थलों का कर रही सर्वे, कमियों को जानने के बाद करेंगे सुरक्षा के उपाय
जिले में जल स्तर बहुत नीचे है। कही- कही पांच सौ फीट गहराई में भी पानी नहीं मिलता है। 2 बड़ी और 5 अन्य छोटी नदियां यहां की जीवन रेखा है, जो अब सूखने की कगार पर है। उसे बचाने के लिए जिले के 50 युवकों ने अभियान छेड़ा है, ताकि जिले में पानी की कमी न हो।
जशपुर पहाड़ी जिला होने के कारण यहां बरसाती पानी रुक नहीं पाता। इसके कारण यहां गर्मी में पानी की समस्या होती है। जिले के जंगलों से पेड़ों की लगातार कटाई होने से यहां से निकालने वाली नदी नाले अब सूखने लगे हैं। इसे बचाने के लिए जिले के पर्यावरण से प्रेम रखने वाले युवकों ने मुहिम छेड़ दी है। पहले जंगलों को बचाने के लिए जहां गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया वही अब स्थिति जानने के लिए जिले की नदियों का स्वस्फूर्त सर्वे किया जा रहा है और इन नदियों के सूखने के कारणों की पहचान की जा रही है।
उपेक्षित है उद्गम स्थल, सहेजने की है जरूरत
वर्तमान में नदियों के संरक्षण के लिए सर्वे कर रहे रामप्रकाश पांडेय, शिवानंद मिश्रा, सत्यप्रकाश तिवारी, एसपी यादव ने बताया कि वे बाकी नदी, श्री नदी, कन्हर नदी के उद्गम स्थल से लेकर जिले के अंदर तक बहाव क्षेत्र का सर्वे कर चुके हैं। सर्वे में यह बात निकल कर आई है कि जहां उद्गम स्थल है, वहां के लोग ही उसकी उपयोगिता के बारे में नहीं जानते हैं। इसके कारण वहां साफ सफाई का अभाव है। ग्रामीणों को जानकारी तक नहीं है कि यह आगे जाकर बड़ी नदियों का रूप ले लेती है। कई जगह खेतों से पतली धार के रूप में निकल रही हैं, जिसे लाेग और संकरा कर दे रहे हैं। वहां संरक्षण के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। उन्होंनें बताया कि वे इसे बचाने के लिए उन उपायों को भी खोज रहे हैं जिससे जिले के नदियों की धार कमजाेर न हों ।
आगे क्या : नदियों को बचाने ग्रामीणों को करेंगे जागरूक
इस संबंध में नदियों काे बचाने और उसके जल स्तर को बरकरार रखने के लिए रामप्रकाश पांडेय ने बताया कि उद्गम स्थल से लेकर जिले के आखिरी छोर तक जो भी गांव पड़ते हैं, वहां जाकर उन गांव के ग्रामीणों को नदियों के बचाव के लिए संकल्पित कराएंगे एवं नदी का पानी स्वच्छ रहे, इसके लिए जनजागृति अभियान चलाएंगे। साथ ही नदियों के किनारे वृहत पैमाने पर पौधे लगाकर उसके संरक्षण के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर इन स्थलों को बचाने का लगातार अभियान चलाया जाएगा, ताकि जिले की नदियों का पानी न सूखे। रामप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि नदियों के संरक्षण के लिए 21-22 अप्रेल को बाला साहब देशपांडेय उद्यान में बैठक रखी गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी, ताकि जिले की नदियों के सरंक्षण की दिशा में युवा अधिक से अधिक भाग लेकर इस जनजागृति अभियान को आंदोलन का रूप दे सकें।
यह भी जानिए : 2 बड़ी और 5 अन्य छोटी नदियां है जिले की जीवन रेखा
कन्हर नदी का उद्गम
लावा नदी : लावा नदी बगीचा के लवई से निकलती है, जोकि जशपुर नगर के पेयजल का प्रमुख स्त्रोत है। लावा नदी में ही एनीकट बनाकर जशपुर के नगरीय क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। यह नदी अपने 35 किलोमीटर का सफर कर शंख नदी में मिल जाती है। राजपुरी नदी बगीचा के पोस्कट गांव से निकल कर राजपुरी जलप्रपात बनाती है।
अन्य नदियां : जशपुर के सिंटोंगा ग्राम से बांकी नदी और श्री नदी एक ही कुंड से निकल कर अलग-अलग दिशा में बहती है। बांकी नदी लावा नदी में जाकर मिलती है, वहीं श्री नदी कुनकुरी के पास से होकर ईब नदी में मिलती है। इसके अलावा भी जिले मे कई पहाड़ी नदी और नाले हैं, जिसका उद्गम जिले से होकर जिले में ही सिमटकर रह जाता है।
ईब नदी : जशपुर जिले के पंडरापाठ के पास कवई गांव से ईब नदी निकलती है। यह नदी 87 किमी लंबी है, जोकि ओडिसा के हीराकुंड डेम से 10 किलोमीटर पहले महानदी में जाकर मिलती है। मैनी, डोडकी इसकी प्रमुख सहायक नदी है।
कन्हर नदी : जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड से कन्हर नदी निकलती है। सोनक्यारी के पास के गीधा गांव से यह नदी निकलती है जो कि 115 किलोमीटर का सफर तयकर सतना जिले के सीमा के पास साेन नदी में मिलती है। सिन्दूर, गलफूला, दातरम, पेंगन इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं।