पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री का व्रत कर चढ़ाए 21 प्रकार के फल
भास्करन्यूज |जशपुर/कुनकुरी/ अंकिरा/ कोतबा
पति की लंबी आयु की कामना के लिए महिलाओं ने मंगलवार को वट सावित्री का व्रत रखा। उन्होंने निर्जला व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर सावित्री-सत्यवान कथा सुनी। मंगलवार को व्रती महिलाओ ने सुबह से पूजन सामग्री एकत्रित कर अपने हाथों से पूजा की थाल सजाकर वट वृक्ष में पूजा कर कच्चे धागे बांधे एवं घर आकर पति की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लिया व प्रसाद ग्रहण किया।
व्रत में ताड़, चार, तेंदू, तरबूज, लीची सहित 21 प्रकार के फलों को प्रसाद के रूप में उपयोग किया जाता है। पूजा में पलास के पत्ते से बने दोना का उपयोग करते हैं। अंकिरा, तपकरा, लवाकेरा, गंझियाडिह सहित क्षेत्र के अनेक गांव की महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की एवं कई महिलाओं ने घरों में ही पूजा की। वहीं मां अम्बे की नगरी गंझियाडिह एवं मुख्य आस्था का केन्द्र कोतईबीरा, कपाटद्वार सहित क्षेत्र के अनेक धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरण किया गया।
व्रति महिलाएं पति की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लिया उसके बाद प्रसाद ग्रहण किया
वट वृक्ष में पूजा कर धागे बांध परिक्रमा करतीं महिलाएं।
बरगद पेड़ के नीचे पूजा-अर्चना करने के बाद सावित्री सत्यवान की कथा सुनते महिलाएं।
कैसे पड़ा व्रत का नाम- इस दिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री.सत्यवान व अन्य इष्टदेवों का पूजन करती हैं। इसी कारण से इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा है। इस व्रत के परिणामस्वरूप सुखद और संपन्न दांपत्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। ऐसे वट सावित्री का व्रत समस्त परिवार की सुख.संपन्नता के लिए भी किया जाता है। दरअसल सावित्री ने यमराज से न केवल अपने पति के प्राण वापस पाए थेए बल्कि उन्होंने समस्त परिवार के कल्याण का वर भी प्राप्त किया था।