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दस्तावेज मिलने के बाद होगी पटवारी की गिरफ्तारी

3 वर्ष पहले
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जमीन के फर्जी नामांतरण का मामला

भास्कर संवाददाता | झाबुआ

मेघनगर तहसील के पटवारी नटवर कछोटिया पर जमीन के फर्जी नामांतरण के मामले में पुलिस ने एसडीएम के आवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है लेकिन पटवारी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं होगी। इसकी वजह है कि अपराध प्रमाणित करने वाले दस्तावेज राजस्व विभाग से पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इन दस्तावेजों के बिना पटवारी को गिरफ्तार कर पेश कर भी दिया गया तो जमानत हो जाएगी।

दरअसल थांदला विधायक कलसिंह भाबर ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि क्या आदिवासी की जमीन की सामान्य के नाम रजिस्ट्री हो सकती है। अगर नहीं तो झाबुआ जिले की मेघनगर तहसील के सर्वे नंबर 332 क्षेत्रफल 1.35 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री 2011-12 में कैसे हो गई। इस सवाल के जवाब में 7 मार्च को राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि हां ऐसा हुआ है। जो गलत है और इसके लिए दोषी पटवारी नटवर कछोटिया को निलंबित किया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके दो दिन पहले 5 मार्च को ही झाबुआ के अपर कलेक्टर ने मेघनगर तहसीलदार को पटवारी कछोटिया पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे। मेघनगर तहसीलदार ने 7 मार्च को मेघनगर थाने पर एक पत्र लिखकर पटवारी कछोटिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा लेकिन पत्र के साथ मूल दस्तावेज नहीं दिए।

धोखाधड़ी के मामले में पुलिस मूल दस्तावेज के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती, इसलिए मामले में एफआईआर नहीं हो सकी। पटवारी कछोटिया को बहाल भी कर दिया है। अब मेघनगर थाना प्रभारी जेआर बर्डे ने मेघनगर तहसीलदार को फिर एक पत्र लिखा है, जिसमें बताया है कि एफआईआर के लिए जरूरी दस्तावेज आपसे मांगे जा रहे हैं लेकिन आपने नहीं दिए हैं। हालांकि इसके बाद भी तहसील से दस्तावेज नहीं दिए गए। एसडीएम की मजिस्ट्रियल जांच के प्रतिवेदन के आधार पर गुरुवार शाम एफआईआर दर्ज कर ली गई लेकिन बिना दस्तावेज एफआईआर के चलते गिरफ्तारी में पेंच फंस गया है।

अभी झाबुआ तहसील में पदस्थ है पटवारी

वर्तमान में पटवारी झाबुआ तहसील में पदस्थ है। थांदला एसडीओपी एमएस गवली का कहना है-आवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। तहसील कार्यालय से दस्तावेज अभी नहीं मिले हैं।

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