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पंडित, मौलवी और टेंट वाले भी रोकेंगे बाल विवाह

3 वर्ष पहले
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पंडित, मौलवी, टेंट वाले, घोड़ी वालों की भी बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी होगी। इन सेवादाताओं को भी बाल विवाह रोकने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना में शामिल किया गया है। महिला सशक्तिकरण के तहत लाडो अभियान को मजबूती दी जा रही है। बाल विवाह रोकने के लिए सभी की जिम्मेदारी तय करने को लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिसए महिला एवंं बाल विकास विभाग एवं राजस्व विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर विशेष नजर रखी जाएगी। कलेक्टर आशीष सक्सेना ने बताया कि जनसामान्य एवं सेवा प्रदाताओं जैसे प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई, केटरर, बैंड वाला, घोड़ीवाला, ब्यूटी पार्लर, टेंट हाउस, ट्रांसपोर्टर, धर्मगुरू एवं समाज के मुखिया से भी सहयोग लेंगे। अगर इन सेवादाताओं को कहीं बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो वह प्रशासन को बताए और ऐसे विवाह में अपना सहयोग न दें।

बाल विवाह रोकने के लिए जिले भर में बाल विवाह रोकथाम समितियां गठित की गई हैं। विवाह सम्मेलनों के आयोजकों से इस आशय के शपथ-पत्र लिए जाएंगे कि उनके सम्मेलनों में होने वाले विवाह में नाबालिग कोई नहीं है। अगर जांच में यह पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। विवाह सम्मेलनों पर अधिकारी और कर्मचारियों का मैदानी अमला पैनी नजर रखेगा। चूंकि आदिवासी जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा रही है, लिहाजा महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस दिन के लिए खास तैयारी की है। सभी परियोजना अधिकारियों को दायित्व सौंपा है कि वे अपने क्षेत्र में भ्रमण कर होने वाले विवाह समारोह पर नजर रखें। जहां भी बाल विवाह की स्थिति नजर आए, उस शादी को तत्काल रुकवाएं।

अक्षय तृतीया आज

सेवा देने वालों को भी बाल विवाह रोकने के लिए तैयार कार्ययोजना में किया शामिल

कंट्रोल रूम पर दी जा सकेगी बाल विवाह की सूचना

जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी आरएस बघेल ने कहा बाल विवाह पर पूरी तरह से रोकथाम के लिए विभागीयस्तर पर तैयारी की गई है। सभी परियोजना कार्यालय को उस परियोजना क्षेत्र का कंट्रोल रुम बनाया जा रहा है। जहां कोई भी व्यक्ति बाल विवाह की सूचना दे सकेगा। अगर सूचना देने वाला व्यक्ति चाहेगा तो उसका नाम गुप्त रखा जाएगा।

बाल विवाह इसलिए नहीं

सरकार ने महिलाओं की शादी की उम्र 18 वर्ष तय की है।

कम उम्र में बालिकाओं की शादी से उनका शारीरिक मानसिक विकास नहीं होता है। बालिका की शिक्षा-दीक्षा अधूरी रह जाती है।

कम उम्र में शादी होने पर बच्चे भी जल्दी हो जाते हैं। चूंकि मां का पूर्ण विकास नहीं होता, इस कारण बच्चे का भी विकास नहीं हो पाता।

समय से पूर्व बालिका घर-परिवार की जिम्मेदारी में बंध जाती है। इस कारण वह अपना जीवन सही ढंग से नहीं जी पाती।

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