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जलाभिषेक अभियान में पहली बार शहर के 38 कुएं व 6 बावड़ियों का कायाकल्प होगा
ब्लॉक कॉलोनी स्थित कुएं को लोगों ने कचरा और मिट्टी से पाट दिया है।
अभी के हालात : कुओं को मिट्टी से पाटा, कहीं कूड़ेदान बना दिया
भास्कर संवाददाता | झाबुआ
मेहताजी के तालाब के किनारे स्थित कुएं को मिट्टी से इसलिए पाट दिया, क्योंकि आसपास के लोगों को डर था कहीं उनके बच्चे न गिर जाएं। मारुतिनगर के पीछे कुएं में पड़ा मलबा भी कुछ यही स्थिति बयां करता है। शहर के कुएं-बावड़ियों के हालात कमोबेश सभी दूर एक जैसे ही हैं। या तो उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है या फिर उन्हें मिट्टी से पाटकर कूड़ेदान में तब्दील कर दिया गया। हालांकि जलाभिषेक अभियान के तहत पहली बार इनके उद्धार की तरफ प्रशासन कदम बढ़ा रहा है। फिर भले ही इनके पानी का उपयोग पीने में न हो लेकिन अन्य कार्यों में तो किया जा सकेगा।
एक समय था जब शहर के 38 कुएं और 6 बावड़ियां पानी की आपूर्ति का मुख्य साधन थे। सरकारी तंत्र की लापरवाही और लोगों की नासमझी में हुई अनदेखी ने इन्हें दुर्दशा की ओर धकेल दिया। नतीजतन अधिकांश कुएं कूड़ेदान बन गए। कुछ को बाकायदा धीरे-धीरे मलबा डालकर बंद करने की कोशिश चल रही है। खास बात यह है कि शहर के 18 में से 17 वार्ड में कुएं या फिर बावड़ी हैं। इसके बावजूद लोग पानी के लिए नल की राह तकते हुए जल संकट झेल रहे हैं।
नगरपालिका द्वारा कभी चाचा नेहरू उद्यान में स्थापित कुएं से शहर में पानी सप्लाय किया जाता था। यहां तक कि प्याऊ में भी इसी कुएं का पानी जाता था। अनदेखी ने कुएं को दुर्दशा की ओर धकेला। अब स्थिति यह है कि नगरपालिका खुद पानी के लिए पीएचई पर निर्भर है। यदि पीएचई के अधिकारी इनकार कर देते हैं या फिर कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो सप्लाय में मुश्किल खड़ी हो जाती है। सीएमओ एमओ निंगवाल ने कहा जलाभिषेक अभियान में इस बार खास तौर पर कुओं की साफ-सफाई और गहरीकरण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद यह देखा जाएगा कि इन जलस्त्रोतों का सही उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
18 वार्ड फिलहाल है शहर में
38 कुएं हैं जिनमें से कुछ ही चालू
06 बावड़ियां हैं, अधिकतर बंद हैं
02 दिन छोड़कर हो रहा पानी सप्लाय
बस थोड़ा प्रयास करने से बदल सकती है ये तस्वीर
बुजुर्ग बोले-हम छोटे थेे तो कुएं का ही पानी उपयोग करते थे
वृद्ध चतुर्भुज भाटी कहते हैं जब हम छोटे थे तो घर के पास वाले कुएं का पानी ही उपयोग करते थे। अब तो नल से भी मटमैला पानी आता है।
अमन कॉलोनी के निवासी नेमीचंद राठौर के अनुसार देखरेख के अभाव में कुएं दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। गर्मी के दिनों में भी इनकी सुध नहीं ली जाती है, जिससे जल संकट के हालात बने हुए हैं। इस ध्यान देना जरूरी है।
शंकरलाल शर्मा ने बताया रामकुल्ला नाले के किनारे के कुओं से कभी लोग वापरने का पानी भरते थे। अब इनमें मिट्टी जमा हो गई है।
रामशंकर जोशी बोले हमारे जमाने में कुएं और बावड़ियां लबालब रहते थे। पानी के लिए कभी इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता था। पूरे साल कुएं और बावड़ी से ही पीने के पानी की पूर्ति बहुत आसानी से जाती है। अब वो दिन कहां रहे।
शहर के कुएं-बावड़ियों की दशा सुधारने के लिए बस थोड़े से प्रयास की जरूरत है। इनकी सफाई व गहरीकरण का कार्य कराकर इन पर जाली लगा दी जाए तो ये पुरातन धरोहर फिर से पानी उगलने लगेगी। इन कुओं-बावडि़यों में मोटर लगाकर घरों तक कनेक्शन दे दिया जाए तो जल संकट का स्थायी निदान हो जाएगा।
जानिए किस वार्ड में कितने कुएं-बावड़ी
वार्ड कुएं बावड़ी
1 8 1
2 3 0
3 2 0
4 1 1
5 0 0
6 1 0
7 1 0
8 4 1
9 5 3
10 2 0
11 1 0
12 1 0
13 1 0
14 1 0
15 1 0
16 2 0
17 2 0
18 2 0
(इनमें वे कुएं भी शामिल है, जिन्हें मिट्टी से पाट दिया गया।)