बुधवार को बुध-कृतिका योग में शुरू हुआ अधिकमास
बुधवार से बुध-कृतिका योग में अधिक मास प्रारंभ हो गया। खास बात यह है कि इसका समापन भी बुधवार को ही (13 जून) को ही होगा।
बुध-कृतिका योग में शुरू हुए अधिकमास में सप्त सागर, नव नारायण और चौरासी महादेव यात्रा, पूजन का विशेष फल मिलेगा। अधिकमास की शुरुआत में विशेष संयोग बने हैं। ज्योतिष के अनुसार ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, बुधवार, कृतिका नक्षत्र, गंड योग व बव करण के साथ उच्च राशि के चंद्रमा में अधिकमास की शुरुआत हुई है।
बुधवार और कृतिका नक्षत्र ने इसे और खास बना दिया है। माह में विशेष व्रत-त्योहारों का भी संयोग रहेगा। सप्त सागर की यात्रा व पूजन से सात गुना, नव नारायण की यात्रा व पूजन से नौ गुना तथा चौरासी महादेव की यात्रा व पूजन से चौरासी गुना पुण्य मिलने का शास्त्रों में उल्लेख है। अधिकमास में ऐसे संयोग बहुत कम बनते हैं।
सप्त सागर के नाम और दान की जाने वाली सामग्री
रूद्र सागर : चांदी का बैल, अन्न, नमक, पुरुष वस्त्र।
पुष्कर सागर : पीला कपड़ा, चने की दाल, पीला फूल, सोना, हल्दी खड़ी, पुखराज।
क्षीरसागर : खीर या दूध से भरा चांदी का पात्र, शकर, चावल, साबूदाना।
गोवर्धन सागर : लाल कपड़ा, गेहूं, गुड़, कासे का पात्र, माखन, मिश्री।
र|ाकर सागर : साड़ी, ब्लाउज, बिछिया, पंचर|, श्रीफल, पुरुष वस्त्र।
विष्णु सागर : आचमनी, पञ्च पात्र, भगवान की मूर्ति, गरुड़जी, गोमुखी माला, आसन और पुराण।
पुरुषोत्तम सागर : कासे की थाली 2 या चलनी, 33 मालपुए, स्वर्ण, गुप्त दान, लाल कपड़ा, कच्चा सूत।