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वैशाख मास में 5 रविवार मतभेद का बनेंगे कारण, महंगाई बढ़ेगी

3 वर्ष पहले
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वैशाख मास चंद्र मास में 5 रविवार होने से कहीं प्राकृतिक प्रकोप की स्थिति बनेगी तो कहीं आंतरिक राजनीतिक मतभेद शासकों को भारी परेशानी में डालेंगे। कुछ प्रांतों में युद्धमय वातावरण की स्थिति निर्मित हो जाएगी। वैशाख मास के द्वितीय पक्ष में गुरु एवं शनि का वक्र गति से चलना तथा शनि और मंगल का शुक्र के साथ षड़ाष्टक योग होने से प्राकृतिक प्रकोप, यान दुर्घटना, अनैतिक घटनाओं का कारण बनेगा। इतना ही नहीं महंगाई से आम जनता परेशान होगी, जिसके कारण शासन और सत्ता से जनता का मोह भंग होगा। ज्योतिष के अनुसार वैशाख मास का प्रारंभ रविवार 1 अप्रैल से हो चुका है। इस चंद्र माह में 5 रविवार पड़ रहे हैं।

इसके साथ ही सूर्य पुत्र शनि का वक्र गति से 18 अप्रैल प्रात: 7.17 बजे से चलना प्रारंभ हो जाएगा। इनकी यह वक्र गति 6 अगस्त तक रहेगी। मंगल और शनि की युति शुक्र एवं राहू का मंगल और शनि से षड़ाष्टक प्राकृतिक प्रकोप, जन-धन हानि एवं देश में आंतरिक कलह एवं सांप्रदायिक मतभेदों को जन्म देगा। सीमा प्रांतों पर भी पड़ोसी देशों से अशांति का माहौल रहेगा। जिन जातकों के लिए शनि कष्टकारी हैं उन्हें दशरथ-कृत शनि स्रोत का नित्य तीन बार पाठ और सरसों के तेल से शिव का रुद्राभिषेक करना लाभप्रद रहेगा।

अक्षय तृतीया से शनि हो जाएंगे वक्री
सूर्य पुत्र शनि 18 अप्रैल को सुबह 7.17 बजे वक्री हो जाएंगे। इस बार शनि अक्षय तृतीया यानी परशुराम जयंती के दिन वक्री हो रहे हैं। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी माना जाता है। इस शुभ दिन इस वर्ष के मंत्री शनि का वक्री होना शनि प्रधान व्यक्तियों के लिए विशेष शुभप्रद रहेगा, लेकिन जिन जातकों की राशि में शनि अशुभ प्रभाव में हैं उस अशुभता में वृद्धि भी अधिक रहेगी। शनि का धनु राशि में वक्रत्व काल 6 सितंबर तक रहेगा। गुरु और शनि के वक्र गति होने और शनि-मंगल का शुक्र के साथ षड़ाष्टक और शुक्र का गुरु के साथ षड़ाष्टक योग होने से अपराध और दुर्घटनाओं में वृद्धि होगी। महंगाई बढ़ेगी।

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