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जिले में खूब बजी शहनाई, दिनभर हुए वैवाहिक आयोजन

3 वर्ष पहले
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वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया खुशियों को अक्षय कर गई। अबूझ मुहूर्त में जिलेभर में खूब शादियां हुई। बाजार में जमकर धन बरसा। घर-आंगन भी महके। बिटिया की विदाई की बेला में आंखें नम हुई तो नई बहू का स्वागत करने वालों के चेहरे खिल उठे।

बुधवार को अक्षय तृतीया पर बाजार में हाट बाजार जैसी रौनक नजर आई। शहर के प्रमुख मार्गों पर बैंडबाजों के साथ बाने निकलते दिखे। जिलेभर में दिनभर यही क्रम चलता रहा। इस शुभ मुहूर्त को भुनाने में व्यापारी भी पीछे नहीं रहे। लोगों ने तेज धूप की परवाह की न कीमती धातुओं के भावों की। व्यापारियों के अनुसार जैसी ग्राहकी पूरे सप्ताह से चल रही थी वैसी एक दिन में हो गई। सबसे ज्यादा खरीदी आभूषण व कपड़े की हुई। शुभ मुहूर्त में लोगों ने वाहन भी खरीदे। बिटिया के लिए झुमके, पायल खरीदे तो दामाद के लिए चेन, अंगूठी की खरीदी भी जमकर हुई। व्यापारियों ने बताया अक्षय तृतीया को शुभ मानकर लोगों ने जरूरत अनुसार वस्तुओं की खरीदी की। लग्नसरा के चलते वैवाहिक खरीदी का जोर चल रहा है। जिन लोगों ने ऑर्डर देकर आभूषण बनवाए थे उन्होंने भी अक्षय तृतीया पर शुभ मुहूर्त में डिलीवरी ली।

इस दिन वाहन, भूमि, भवन खरीदी के साथ ही विवाह, नए अनुबंध और नया व्यवसाय प्रारंभ करना भी विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि स्वर्ण धातु पर लक्ष्मी व विष्णु का आधिपत्य है और जीवन में सुख-समृद्धि के कारक देवी-देवता भी यही हैं। खरीदी गई वस्तु खरीदार के पास स्थाई बनी रहे, इसलिए अक्षय तृतीया पर खरीद-फरोख्त का अधिक चलन है। वाहन के शोरूम पर भीड़ रही। पंडित हिमांशु शुक्ल ने बताया अक्षय तृतीया का अर्थ है कि जिसका कभी क्षय न हो। यही वजह है कि लोग इस दिन जरूरत की वस्तुओं की खरीदी इस भावना और विश्वास के साथ करते हैं कि वह उनके पास अधिक समय तक रहेगी।

बाजार में हाट बाजार जैसी रही भीड़, शुभ मुहूर्त में लोगों ने की खरीदारी, सराफा बाजार भी रहा रोशन

झाबुआ. अक्षय तृतीया पर निकले वरघोड़े में दूल्हे ने भी रास्तेभर जगह-जगह नृत्य किया।

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