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...इधर गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर में साध्वीश्री कीर्तिलता ने बताया अक्षय तृतीया का महत्व

3 वर्ष पहले
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झाबुआ | गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर में बुधवार को अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य साध्वीश्री कीर्तिलता के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। शुभारंभ साध्वीश्री श्रेष्ठप्रभाजी ने मंगल गीत गाकर की। पश्चात प्रवेश हुए।

साध्वीश्री कीर्तिलताजी ने कहा यह एक ऐसा पर्व है जिसके साथ जुड़ा है एक इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और एक पंरपरा। अक्ष्य का अर्थ है जो कभी क्षय नहीं होता, जिन परंपराओं के अनुसार भगवान ऋषभ की सुदीर्घ तपस्या का पारणा अपने पड़पौत्र कुमार श्रेयांश के हाथों से वैशाख शुक्ला तृतीया के दिन यानि आज के दिन हुआ अत: आज का दिन अक्षय अजर व अमर बन गया। साध्वीश्री ने कहा अक्षय तृतीया का पर्व संयम का पर्व है। 12 महिनों में 6 महिनों तक बिल्कुल न खाना महान आश्चर्य है। साध्वी शांतिलताजी, पूनमप्रभाजी, श्रेष्ठप्रभाजी ने भी अक्षय तृतीया के महत्व को बताया। पूनमप्रभाजी ने तप की महिमा बताते हुए अपने चौथे वर्षीतप का श्रेय गुरु को प्रदान किया। श्रेष्ठप्रभाजी ने तप की अनुमोदना की। संचालन साध्वी शांतिलताजी ने किया। सभा अध्यक्ष नीरज गादिया ने सबका स्वागत किया। वर्षीतप करने वाली मनीला पंकज मेहता के तप की अनुमोदना ने पारस धारीवाल, मीनल सकलेचा, गुंजन मेहता, अंशिका मेहता, मीना मेहता ने अपने विचार व्यक्त किए।

झाबुआ. गौड़ी पार्श्वनाथ मंदिर में हुई धर्मसभा में साध्वीश्री ने अक्षय तृतीय का महत्व बताया।

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