मुस्लिम समाज के रमजान माह शुरू हो चुके हैं। इस बार मई की गर्मी में रोजे समाजजनों का इम्तिहान लेंगे। माह के पहले जुम्मे पर मोहम्मदी मरकज मसजिद और जामा मसजिद में विशेष नमाज पढ़ी गई। मरकज मसजिद में रमजान के महत्व बताने के साथ समाजजनों को इफ्तार के वक्त खाने-पीने में बरती जाने वाली सावधानी से भी अवगत कराया।
मौलाना बशीर अहमद अल मजाहिरी ने कहा सिर्फ भूखे रहना ही रोजा नहीं होता। रोजा पूरे जिस्म का होता है। आंख, कान, हाथ, पैर का भी रोजा होता है। रोजे में गलत देखना, बुरा सुनना और हाथ-पैर से गलत काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा दिनभर रोजा रखने के बाद शाम को इफ्तार के दौरान खाने-पीने में सावधानी बरतने की जरूरत है। यह सेहत के लिहाज से बहुत जरूरी है। इफ्तार में कोल्डड्रिंक और शरबत का इस्तेमाल तुरंत ना करें। इसकी बजाए खजूर और ठंडे पानी से रोजा इफ्तार किया जाए। रोजे के तुरंत बाद कोल्डड्रिंक पीने से सेहत पर असर पड़ सकता है। इफ्तार के करीब आधे घंटे बाद शरबत या कोल्डड्रिंक जैसे पेय पदार्थ लें तो कोई हर्ज नहीं। उन्होंने कहा हमारे नबी मोहम्मद (सअव) भी खजूर से रोजा इफ्तार करते थे। मौलाना बशीर ने कहा रमजान माह इबादत का महीना है। इस महीने की कदर की जाए। सभी लोग रोजे रखे। उन्होंने महीने में एक दूसरे को माफ कर आपसी दूरी मिटाने की बात भी समाजजनों से कही।
एक माह बाद मनाई जाएगी ईद : मुस्लिम समाज 29 या 30 रोजे के बाद जून माह में ईद मनाएगा। एक माह तक रोजे रखकर खुदा की इबादत की जाएगी। रात को ईशा की नमाज के बाद तरावीह की तिलावत शहर की मसजिदों में चल रही है। यह पूरे एक माह तक चलेगी। रमजान के तीन अशरे होंगे। अभी पहला अशरा चल रहा है। आखिरी अशरे में शबे कद्र मनाई जाएगी। इस रात समाजजन जागकर इबादत करेंगे। इसके अलावा इस माह गरीबों की मदद करने का भी महत्व है। चांद दिखने पर 14 या 15 जून को ईद मनाई जाएगी।
जामा मसजिद में जुम्मे की विशेष नमाज पढ़ी गई।
गुरुवार को चांद देख शुक्रवार को रखा रोजा
उधर, जामा मसजिद क्षेत्र के लोगों ने गुरुवार शाम को रमजान का चांद देखा। क्षेत्र के लोगों ने शुक्रवार को पहला रोजा रखा। शाम को चांद दिखते ही लोगों ने पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई। गौरतलब है कि चांद दिखने न दिखने के कारण मरकज मसजिद क्षेत्र के समाजजनों ने समाज के वरिष्ठ मौलवियों के मार्गदर्शन में चांद की तहकीक कर गुरुवार को पहला रोजा रखा था।