पटवारी पर एफआईआर के लिए पुलिस ने फिर मांगे मूल दस्तावेज
मामला विधानसभा में उठे आदिवासी की जमीन की रजिस्ट्री सामान्य के नाम से होने का
भास्कर संवाददाता. झाबुआ
मेघनगर तहसील के पटवारी नटवर कछोटिया पर एफआईआर दर्ज करने के लिए मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पुलिस ने एक बार फिर तहसीलदार को पत्र लिखा है।
दरअसल थांदला विधायक कलसिंह भाबर ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि क्या आदिवासी की जमीन की सामान्य के नाम रजिस्ट्री हो सकती है। अगर नहीं तो झाबुआ जिले की मेघनगर तहसील के सर्वे नंबर 332 क्षेत्रफल 1.35 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री 2011-12 में कैसे हो गई। इस सवाल के जवाब में 7 मार्च को राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि हां ऐसा हुआ है। जो गलत है और इसके लिए दोषी पटवारी नटवर कछोटिया को निलंबित किया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके दो दिन पहले 5 मार्च को ही झाबुआ के अपर कलेक्टर ने मेघनगर तहसीलदार को पटवारी कछोटिया पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे।
मेघनगर तहसीलदार ने 7 मार्च को मेघनगर थाने पर एक पत्र लिखकर पटवारी कछोटिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा लेकिन पत्र के साथ मूल दस्तावेज नहीं दिए। धोखाधड़ी के मामले में पुलिस मूल दस्तावेज के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती, इसलिए मामले में एफआईआर नहीं हो सकी। पटवारी कछोटिया को बहाल भी कर दिया है। अब मेघनगर थाना प्रभारी जेआर बर्डे ने मेघनगर तहसीलदार को फिर एक पत्र लिखा है, जिसमें बताया है कि एफआईआर के लिए जरूरी दस्तावेज आपसे मांगे जा रहे हैं लेकिन आपने नहीं दिए हैं। राजस्व मंत्री के निर्देशों के बावजूद दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने से विभाग के अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।