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यात्रियों ने जीपों पर लटककर किया सफर आज से चलेंगी बसें, कल होगी अफसरों से चर्चा

3 वर्ष पहले
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सोमवार को दिन भर यात्री बस संचालकों की हड़ताल की वजह से परेशान रहे। लेकिन आज से उन्हें वैसी परेशानी नहीं उठाना पड़ेगी। क्योंकि बसे चलेंगी। मंगलवार को परिवहन विभाग के अफसर बस मालिकों से चर्चा करेंगे। हालांकि झाबुआ में गुजरात और राजस्थान की ओर चलने वाली बसें तो आई लेकिन आलीराजपुर, थांदला और ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसों के नहीं आने से यात्री परेशान हुए। मजबूरी में लोगों ने ओवरलोड जीपों में भी सफर किया।

हड़ताल के चलते जिले में चलने वाली करीब 130 बसें बंद रही। सोमवार सुबह शहर के बस स्टैंड पर बस का इंतजार करते कई यात्री देखे गए। दरअसल, किराए में 40 प्रतिशत की वृद्धि की मांग को लेकर मध्यप्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन के आह्वान पर बस मालिकों ने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल का आह्वान किया था। जिसका व्यापक असर नजर आया। हड़ताल के चलते इंदौर की ओर जाने वाली चुनिंदा बसें तो चली, लेकिन राणापुर, जोबट, आलीराजपुर, मेघनगर, थांदला, कल्याणपुरा की ओर जाने वाली एक भी बस जिले के किसी भी रूट पर नहीं चल पाई। ऐसे में बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा। उधर, जिन यात्रियों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वे बस स्टैंड पहुंच गए। काफी देर तक खड़े रहे, लेकिन कोई बस नहीं आई। इसके बाद कुछ निराश होकर घर लौट गए तो कुछ गुजरात व राजस्थान राज्य परिवहन निगम की बसों के आने का इंतजार करते रहे। कुछ ने अपने गंतव्यस्थल तक जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की।

बसें नहीं चली तो लोगों ने जीपों में इस तरह की यात्रा।

जीप का लिया सहारा

जिले में चलने वाली यात्री बसों के बंद रहने के कारण जीप चालकों की मौज हो गई। अमूमन दाहोद, मेघनगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जीप चलाने वाले लोग लंबे रूट पर भी जीप में सवारी भरकर ले जाते नजर आए। कई जीप चालकों ने यात्रियों से मनमाना किराया भी वसूला। बस स्टैंड से भी जीप चालक सवारी भरते देखे गए। दिनभर यही स्थिति रही। अप-डाउनर्स को खासी परेशानी आई। ओवरलोड जीपें भी शहर में खूब चली। वहीं ग्रामीणों ने आसपास के गांवों तक जाने के लिए ऑटोरिक्शा में सफर किया। रिक्शा चालक ने भी उनसे मनमाफिक किराया वसूल किया। हालांकि बसें नहीं चलने की वजह से ज्यादातर यात्रियों ने जीपों का सफर किया। जिसे जहां जगह मिली वो बैठ गया।

गुजरात और राजस्थान की बसें आई

दो कंपनी के बस संचालकों ने हड़ताल को समर्थन नहीं दिया था। लिहाजा इंदौर की ओर चलने वाले इस कंपनी की बसें अपने तय समय पर बस स्टैंड आई। इसके अलावा गुजरात और राजस्थान की ओर से आने वाली बसें भी तय समय पर बस स्टैंड पहुंची। ऐसे में इंदौर, धार, राजगढ़ व गुजरात की ओर जाने वाले यात्रियों को भीड़भरी बस में सफर करना पड़ा।

बस स्टैंड पर इंदौर की ओर जाने वाली कुछ प्राइवेट बसें खड़ी थी। बाकी कोई बस नजर नहीं आई।

सूरत से मजदूरी करके आया परिवार हुआ परेशान

जगदीश डावर अपने परिवार के साथ गुजरात के सूरत से मजदूरी करके लौटा था। उसके परिवार के सात सदस्य साथ में थे। उसे पारा के पास ग्राम दौलतपुरा जाना था। जगदीश ने बताया वह साढ़े 10 बजे से बस स्टैंड पर खड़ा है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक बस नहीं आने से परिवार परेशान होता रहा।

गांव जाने तीन घंटे किया इंतजार

सुबह 10 बजे गुजरात एसटी से अहमदाबाद से आई सुरबाला बस बस स्टैंड उतरी तो उसे कोई वाहन नजर आया। उसे अपने गांव सेमलखेड़ी जाना था। सुरबाला दोपहर 1 बजे तक बस का इंतजार करती रही। लेकिन एक भी बस नहीं आई। करीब तीन घंटे इंतजार करने के बाद जीप से जाना पड़ा।

भीड़ की वजह से नहीं बैठे जीप में

दितिया भयड़िया निवासी भांडाखापर और कमलेश हिहोर राणापुर सुबह सात बजे से राणापुर की ओर जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़े थे। उनके साथ एक आठ साल का बच्चा भी था। दोपहर 12 बजे तक उन्हें एक भी बस राणापुर की ओर जाने के लिए नहीं मिली। भीड़ होने की वजह से वे जीप में भी नहीं बैठे।

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