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झाबुआ में पहली बार 35 हजार टन की गेहूं की खरीदी

3 वर्ष पहले
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जिले में लंबे समय से आदिवासी किसान जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण खेतों में उपजा अपना अनाज मंडी/खरीदी केंद्रों तक लाने के बजाए औने-पोने दाम पर ही पल्ली व्यापारियों को बेच देते थे लेकिन इस साल के समर्थन मूल्य पर हुई गेहूं खरीदी ने इस धारणा को बदला है। 15 मई को समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी खत्म हुई है।

पहली बार झाबुआ जिले में 35 हजार टन से ज्यादा गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान पहुंचे। यह पहली बार है जब जिले में 35 हजार टन गेहूं समर्थन मूल्य की सरकारी खरीदी में किसानों ने बेचा है। इसके पहले तक किसी भी वर्ष 30 हजार टन गेहूं भी नहीं खरीदा गया। दरअसल इस बार कलेक्टर आशीष सक्सेना ने समर्थन मूल्य व बोनस का किसानों काे लाभ दिलाने के लिए एक फॉर्मूला बनाया था।

पिछले वर्षों में देखा गया था कि जानकारी के अभाव में किसान अपना पंजीयन ही नहीं कराते थे। उन्हें बाद में जानकारी मिलती भी थी तो पंजीयन नहीं रहता था। पटवारी, सचिव व ग्राम सेवकों को किसानों के घर तक भेज कर सभी किसानों का पंजीयन करवाया। आदिवासी किसानों के पास रकबा कम होने से अनाज कम मात्रा में होता है। ऐसे में वे किराये पर ट्रैक्टर ट्रॉली में अनाज लेकर खरीदी केंद्र तक आने का खर्च वहन नहीं कर पाते थे। इसलिए ग्राम स्तर पर एक ट्रॉली में दो से तीन किसानों का गेहूं भरकर लाने की समझाइश दी गई, यह भी काम आई।

कलेक्टर का कहना है हमनें जो व्यवस्थाएं की, उससे तो प्रभाव पड़ा ही है लेकिन शासन ने इस बार जो 265 रुपए क्विंटल बोनस दिया है, उससे भी किसान आकर्षित हुए हैं। अन्य राज्यों में गेहूं मप्र से कम दामों में बिका है। आदिवासी किसानों को इस बार गेहूं का सही दाम मिला है तो उनकें खुशी भी है।

आदिवासी किसानों में बढ़ी जागरूकता, घर तक पहुंचकर पंजीयन का फॉर्मूला काम आया

किसानों को 7 के बजाय 3 दिन में भुगतान

शासन की व्यवस्था खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेचने वालों को सात दिन के भीतर भुगतान कराने की है। जिले में उपज देकर नकद रुपए लेने की किसानों की प्रवृत्ति का फायदा उठा कर पल्ली व्यापारी उनसे कम दाम में उपज खरीद लेते हैं। ऐसे में जिला आपूर्ति विभाग ने शासन की व्यवस्था से पहले भुगतान कराने की व्यवस्था कराई। सात के बजाय सिर्फ तीन दिन में किसानों काे भुगतान कराया गया। जिला आपूर्ति अधिकारी मुकुल त्यागी ने बताया 15 मई को खरीदी का समापन हुआ, तब तक 12 मई तक उपज बेचने वाले किसानों का भुगतान हो चुका था। कुल 60.90 करोड़ का भुगतान किया जाना था, जिसमें से 12 मई तक का 52.22 करोड़ का भुगतान कर दिया गया था। समय पर भुगतान मिलने से किसानों को भी कोई परेशानी नहीं हुई।

इस साल ज्यादा खरीदी

वर्ष पंजीयन खरीदी टन में

2015 7822 29044

2016 7895 8761

2017 8006 29128

2018 10322 35101

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