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पिटोल से प्रदेश की सीमा में हुआ रत्नसुंदर सूरीश्वरजी का प्रवेश, कल झाबुआ आएंगे

3 वर्ष पहले
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गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित पिटोल में रविवार सुबह आचार्य श्रीमद्विजय र|सुंदरसूरीश्वरजी का मंगल प्रवेश हुआ। उन्होंने गुजरात से मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। आगवानी के लिए प्रदेश के मालवा निमाड़ व जिले के लोग उमड़े। ढोल-ढमाके व नर्तक दलों से आचार्यश्री की भव्य अगवानी की।

उल्लेखनीय है कि देशभर में भ्रमण के बीच 14 वर्षो में आचार्यदेव का मालव भूमि में पदार्पण हुआ है। मंगलवार को वे पिटोल से झाबुआ पहुंचेंगे। जहां विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे। इसके बाद बड़नगर के लिए विहार करेंगे। आचार्यदेव का बड़नगर में चातुर्मास होगा। आचार्यश्री के साथ 33 साधु-साध्वियों की अगवानी करने सांसद कांतिलाल भूरिया भ पहुंचे और संत मंडल से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा सैकड़ों महिला पुरुषों ने लीला शांति जयंत विहार धाम पर आयोजित कार्यक्रम में संत श्री के प्रवचनों को सुना। झाबुआ विधायक शांतिलाल बिलवाल भी पहुंचे और प्रवचन का लाभ लिया। कार्यक्रम में धार, इंदौर, उज्जैन, बड़नगर, बदनावर, कुक्षी, मनावर व रतलाम जिले के जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में शामिल हुए। र| परिवार इंदौर बड़नगर द्वारा की गई व्यवस्थाओं के बीच इस वृहद स्तरीय कार्यक्रमों का सभी उपस्थित जनों ने रसपान किया। प्रदेश के अनेक जिलों से भी जैन संत के दर्शनार्थ अनुयायी बड़ी संख्या में पिटोल पहुंचे और दिनभर उनका आना जाना बना रहा।

आचार्यश्री की अगवानी करने विभिन्न स्थानों से पिटोल पहुंचे समाजजन।

राजकीय अतिथि थे इसलिए प्रशासन ने भी की आगवानी

पद्मभूषण र|सुंदरसूरीश्वरजी को प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा दिया गया था। इसके चलते उनके सम्मान में जिला प्रशासन का अमला भी अगवानी करने के लिए अलसुबह से ही पिटोल पहुंच गया था। एसडीएम केसी परते व एसडीओपी आरसी भाकर ने यहां आकर आचार्यश्री का स्वागत किया। आचार्यश्री की अगवानी की सूचना मिलने पर प्रशासन का अमला एक दिन पहले ही अलर्ट था।

22 से 24 मई तक झाबुआ में

22, 23 तथा 24 मई को वे झाबुआ में होने वाले तीन दिवसीय परिवर्तन प्रवचन माला के अंतर्गत होने वाले आयोजनों में निश्रा प्रदान करेंगे।अनेक राष्ट्रीय धार्मिक चैनलों के माध्यम से विश्व में नैतिकता व धार्मिकता का संदेश प्रदान करने वाले पद्मभूषण आचार्यश्री ‘ऐसो जनम बार-बार’, ‘जीवन एक संघर्ष’ व ‘मैं ही क्यों’ विषयों पर स्थानीय पैलेस गार्डन पर प्रकाश डालेंगे।

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