10 दिनों में बहनों ने मोहनखेड़ा तीर्थ में संस्कारों के साथ ज्ञानार्जन किया है इस ज्ञान का उपयोग अपने जीवन में अंगीकार करने का प्रयास करें और जीवन में श्रेष्ठता को प्राप्त करें। हमने निगोद से यात्रा प्रारंभ की थी आज प्रभु की गोद में आ चुके है। जब से हमारे हाथों में मोबाइल आया है तब से मानव के दिलों में करुणा गायब हो गई है। लोग एक्सीडेंट के दौरान घायलों को मद्द करने के बजाय वीडियो लेने में व्यस्त रहते है, जो गलत है। जीवन में अरिहंतों, महादेवों का सूत्र याद रखेगें तो अपने मार्ग से कभी नहीं भटकेगें। यह बात मोहनखेड़ा तीर्थ पर आयोजित 10 दिवसीय युवती संस्कार शिविर के समापन पर रविवार को मुनि पुष्पेंद्रविजयजी ने कहीं।
आचार्य ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी के आज्ञानुवर्ती मुनि पुष्पेंद्रविजयजी, मुनि जीतचंद्रविजयजी, मुनि जनकचंद्रविजयजी आदि मुनि मंडल एवं सेवाभावी साध्वी संघवणश्रीजी आदि ठाणा की निश्रा में रविवार को आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेताम्बर पेढ़ी ट्रस्ट मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वावधान में 10 दिवसीय युवती संस्कार शिविर का समापन हुआ। शिविर में आई बालिका एवं युवतियों ने अपने 10 दिन के शिविर में प्राप्त किए अनुभवों को साझा किया। उन्होंने शिविर में ज्ञान प्राप्ति के साथ जीवन जीने की कला के संस्कार भी प्राप्त किए। मुनि जीतचंद्रविजयजी ने गीत की प्रस्तुति देते हुए अपने जीवन की घटना सभी को बताई। पेढ़ी ट्रस्ट की और से राजगढ़ श्रीसंघ के वरिष्ठ समाजसेवी सेवंतीलाल मोदी, संतोष चत्तर, दिलीप भंडारी, नरेंद्र भंडारी पार्षद आदि ने शिविर में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाली शिविरार्थी बहनों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन पुखराज जैन भाटपचलाना ने किया। कार्यक्रम में बालिकाओं ने वर्तमान में चल रही कुरीतियों पर कटाक्ष करते हुए नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियां देकर सभी के दिल को झकझोरने का प्रयास किया। झाबुआ, महिदपुर, इंदौर, राजगढ़, अहमदाबाद आदि श्रीसंघों का आगमन हुआ।
आयोजन
मोहनखेड़ा तीर्थ में 10 दिवसीय युवती संस्कार शिविर के समापन पर मुनि पुष्पेंद्रविजयजी ने कहा
राजगढ़ . बालिकाओं ने कुरीतियों पर कटाक्ष कर नृत्य की प्रस्तुतियां दी।