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उत्कृष्ट विद्यालय के व्याख्याता ने 32 विद्यार्थियों के साथ किया पानी बचाने का प्रयोग, अब नहाते समय रोज करीब 4 लीटर पानी बचा रहा है एक विद्यार्थी

3 वर्ष पहले
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पानी बचाने और नहाते समय व्यर्थ होने वाले पानी का अनुमान लगाने के लिए एक व्याख्याता ने 32 विद्यार्थियों के साथ प्रयोग किया। दो दिन किए गए इस प्रयोग के बाद बच्चों ने भी पानी का महत्व समझा। अब प्रत्येक विद्यार्थी नहाते समय रोजाना करीब 4 लीटर पानी बचा रहा है। प्रयोग का उद्देश्य सभी को पानी बचाने और जल संरक्षण का संदेश देना था।

गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्त्रोतों ने भी साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। पानी की एक-एक बूंद कीमती होती जा रही है। ऐसे में लोग नहाते समय कितना पानी व्यर्थ बहा देते हैं उन्हें भी नहीं पता रहता। इसी को देखते हुए स्थानीय उत्कृष्ट विद्यालय के व्याख्याता लोकेंद्रसिंह चौहान ने स्कूल के 32 विद्यार्थियों के साथ नहाते समय पानी बचाने के लिए प्रयोग शुरू किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को जल को मापने की सामान्य विधि बताई। दो दिन के इस प्रयोग में पहली बार यह बात सामने आई कि राेज की तरह मस्ती करते हुए नहाने में औसत एक बालक 19.5 लीटर पानी खर्च करता है, लेकिन जब सावधानीपूर्वक पानी व्यर्थ किए बिना नहाया गया तो एक बालक ने आैसत 15.55 लीटर पानी का इस्तेमाल किया। यानी औसत 3.99 लीटर (करीब 4 लीटर) पानी की बचत हुई। अगर एक बालक रोजाना पानी बचाते हुए नहाए तो एक वर्ष में 1 हजार 438 लीटर पानी बचा सकता है।

 

पहले दिन विद्यार्थियों ने पानी को मापा, दूसरे दिन पानी व्यर्थ होने से बचाया



बच्चों को पानी बचाने की जानकारी देते व्याख्याता लोकेंद्रसिंह चौहान।

पानी बचाने के लिए जागरूक करना था प्रयोग का उद्देश्य

उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के व्याख्याता लोकेंद्रसिंह चौहान ने कहा प्रयोग का उद्देश्य पानी बचाने के लिए सभी को जागरूक करना था। पानी बचाने का संदेश देने की शुरुआत मैंने विद्यार्थियों से की है, क्योंकि विद्यार्थी अभी से पानी बचाने की ठान लेंगे तो वो अपने मित्रों के साथ-साथ परिवार में जहां भी पानी व्यर्थ बहता उन्हें दिखेगा वो जरूर टोकेंगे और उन्हें समझाइश देकर पानी का महत्व भी बताएंगे। पानी बचाने की दिशा में मेरा ये छोटा सा प्रयास है।

बाल्टी से नहाने वाले 32 विद्यार्थियों ने एक दिन पहले अपने निवास पर उस पानी को मापा जो सामान्यत: वे एक समय में नहाने के लिए मस्ती में उपयोग करते हैं। दूसरे दिन उन्होंने ध्यानपूर्वक लेकिन पूर्ण रूप से नहाकर उस पानी की मात्रा को नोट कर मापा कि कितना पानी बचा जो व्यर्थ हो रहा था। नापने के बाद करीब चार लीटर पानी प्रत्येक विद्यार्थी ने बचाया। व्याख्याता की सीख के बाद अब विद्यार्थी पानी बचा रहे हैं।

प्रयोग के बाद विद्यार्थी बोले

छात्रा स्नेहा बघेल ने कहा हमें मस्ती में पानी फेंकते हुए नहीं नहाना चाहिए। यदि हम पानी बचाएंगे तो आने वाले समय में हमें परेशानी नहीं उठाना पड़ेगी।

सुनील डामोर ने कहा व्यर्थ बहाए गए पानी को यदि पशु-पक्षियों के लिए रखते हैं तो उनकी प्यास बुझ सकती है।

दीपक पाल ने कहा प्रयोग से मुझे पता चला कि पानी की एक-एक बूंद का महत्व है।

भारती खड़िया ने कहा मुझे समझ में आया कि पानी कितना महत्वपूर्ण है। अगर यह पानी मैं पौधों में डालती तो कितने पौधे पनप सकते थे।

शक्ति बुधवंत ने कहा जल का प्रयोग हमें आवश्यकतानुसार करना चाहिए। हमें पानी व्यर्थ करते समय यह जरूर सोचना चाहिए कि कहीं पर लोगों को थोड़ी पानी भी नहीं मिलता है।

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