जीवन में अभिमानरहित होना ही भगवान की भक्ति
भक्ति से वशीभूत भक्त ही भगवान के हृदय पर राज करते हैं। भगवान केवल मात्र भक्तों के प्रेम और भक्ति के नाते को ही मानते हैं। हरीपुरा स्थित श्रीराम धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को भक्ति के विभिन्न रूपों पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कथाव्यास पंडित विमल कृष्ण पाठक ने अमृत वर्षा की। कथाव्यास ने नवधा भक्ति के नौ रूप बताते कहा कि इन नौ भक्तियों में सत्संग सुनना और सत्संग करना क्रमश: पहली और दूसरी भक्ति हैं।
उन्होंने बताया कि गुरु पूजा को भक्ति का तीसरा रूप बताया गया है। वहीं, मानव का अपने जीवन में अभिमान रहित होना भगवान की भक्ति का चौथा रूप है। मानव जीवन में मंत्र जाप करते हुए कपट का त्याग करना भक्ति का पांचवां रूप है वहीं, निष्काम भाव से किए गए सत्कर्म को भगवान की भक्ति का छठा रूप बताया गया है। कथाव्यास ने बताया कि सदैव मन में भगवत भाव रखना भक्ति का सातवां रूप है वहीं, अपने कर्मवश जीवन में होने वाली लाभ व हानि से संतुष्ट रहना भक्ति का आठवां रूप है।
कथाव्यास ने उद्धव से भगवान कृष्ण की भक्ति को नौवां रूप बताते हुए कहा कि अपने जीवन को प्रभु चरणों में समर्पित कर देना ही भक्ति का नवम रूप है। इस मौके पर कथाव्यास ने अपने मधुर भजनों के साथ श्रीमद्भागवत को संगीतमयी रूप देते भक्तों को झूमने पर मजबूर किया।
आज होगा कथा
का समापन
श्रीराम धर्मशाला में पिछले मंगलवार से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार शाम समापन हो जाएगा। कथा के समापन के बाद मंगलवार को धर्मशाला प्रांगण में ही पूर्णाहुति यज्ञ होगा। महिलाओं को कलश वितरण करने के बाद भंडारा होगा।
कथा में ये थे मौजूद
इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस और भाजपा के नेतागण भी कथा श्रवण करने पहुंचे। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डाॅ. अशोक तंवर भी पहुंचे। भाजपा जिलाध्यक्ष बिजेंद्र दलाल, पूर्व मंत्री कांता देवी, कांग्रेसी नेता रमेश वाल्मीकि, हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डाॅ. अशोक नागपाल, राधेश्याम भाटिया, हेमन्त भगाना, राजरानी, एडवोकेट माणिकचन्द गुप्ता, बिट्टू चुघ, डाॅ. राम पोपली, विजय रुखाया, जयदेवी, आशा चुघ, रमा गेरा, शाम पेंटर, जग्गी गेरा, शम्मी गेरा, जग्गी कटारिया उपस्थित रहे।