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महंगी बाइकों और कारों से बच्चों को पेपर दिलाने आए गरीब होने का शपथपत्र देने वाले

3 वर्ष पहले
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शिक्षा के नियम 134-ए के तहत जिला प्रशासन को गरीब होने का शपथ पत्र देने वाले कई लोग रविवार को महंगी बाइकों और कारों के साथ अपने बच्चों को परीक्षा दिलाने आए। झज्जर के बीकानेर चौक स्थित दोनों राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में ठीक 9 बजे से परीक्षाएं शुरू हुई। सबसे अहम यह रहा कि राजकीय कन्या स्कूल में 12 कारों से लोग अपने बच्चों को लेकर आए। एक आर्मी पर्सन ने तो स्कूल के अंदर ही अपनी कार खड़ी की। ताकि कोई यह नहीं देख सके कि वह गरीब होने की श्रेणी में अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने पहुंचा है।

कक्षा 9 से 11 तक की परीक्षाएं राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में हुई। यह परीक्षा देने में बच्चे काफी उत्साहित दिखे और सुबह 9 से 11 बजे के बीच ही परीक्षा देकर परीक्षा केंद्र से बाहर आ गए। इन तीनों कक्षाओं के लिए कुल 189 बच्चों ने परीक्षाएं दी। इनमें से मात्र 2 ही बच्चे गैर हाजिर रहे। इस प्रकार कक्षा 2 से आठवीं कक्षा में प्रवेश के लिए परीक्षा राजकीय कन्या स्कूल में हुई। इसमें कुल 973 बच्चों को आना था, लेकिन 944 ही परीक्षा देने आए। इस तरह इन कक्षाओं के लिए 29 बच्चों ने परीक्षाएं नहीं दी।

झज्जर. झज्जर शहर के बीकानेर चौक िस्थत राजकीय स्कूल में परीक्षा खत्म होने के बाद परीक्षा केंद्र से बाहर आती कार, िजसमें तीन बच्चे बैठे थे। एक दर्जन से ज्यादा कारों में बच्चे परीक्षा देने आए।

ये है परीक्षा की स्थिति

कक्षा आवेदन परीक्षा देने

आए वाले बच्चे

2 132 123

3 135 132

4 138 134

5 165 161

6 144 139

7 131 126

8 128 126

9 108 108

11 71 71

11 10 8

3 साल से निजी स्कूल संचालक कर रहे विरोध

निजी स्कूल संचालक इस बात का विरोध बीते तीन साल से कर रहे हैं कि शिक्षा विभाग में जिन लोगों ने गरीब होने का शपथ पत्र दिया है, ऐसे लोगों की आय के साधन और शपथ पत्रों की जांच होना चाहिए।

आदेश मानना मजबूरी : सीबीएसई स्कूल सहोदया काम्प्लेक्स के चेयरमैन रमेश रोहिल्ला का कहना है कि उनके खुद के स्कूल में ऐसे अभिभावक हैं जो कार की चाबी का छल्ला घुमाकर स्कूल में आते हैं जिन्होंने अपने बच्चे का दाखिला 134-ए के तहत कराया है। अब उनकी मजबूरी है कि प्रशासन के आदेश का पालन करते इन बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।

बेरी में 246 में से 228 बच्चों ने दी परीक्षा

कस्बे के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 246 में से 228 आवेदकों ने परीक्षा में भाग लिया।

सालाना आय दो लाख से

कम, वो है पात्र

नियम 134-ए के तहत वो ही परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूल में मुफ्त पढ़ाने का हकदार है, जिसकी सालाना आय दो लाख तक है। अगर सालाना इनकम इससे ज्यादा है या फिर वो अपने सभी भौतिक सुविधाओं खुद का मकान, वाहन, महंगा मोबाइल, एसी, महंगे इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल वस्तुओं का उपयोग करता है वो गरीब की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।

अभिभावकों के आय से संबंधित पत्रों की जांच हो

हरियाणा शिक्षा बोर्ड से संबंधित निजी स्कूल एसोसिएशन के प्रधान जगवीर चाहार का कहना है कि पिछली बार तो जिला प्रशासन ने मांगों को अनसुना कर दिया, लेकिन इस बार उन सभी अभिभावकों के आय से संबंधित शपथ पत्रों की जांच होना चाहिए।

बीईओ बोले, शिकायत आने पर जांच होगी

झज्जर ब्लाॅक के शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र सांगवान का कहना है कि किसी स्कूल से फर्जीवाड़े की शिकायत आएगी तब शपथपत्रों की जांच जरूर की जाएगी।

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