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5 गांवों से 4-6 लोग ही आए, मंत्री ने मीटिंग स्थगित कर कहा-ट्रॉली भरकर आना, फिर समस्या सुनेंगे

3 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय के संवाद भवन में कृषिमंत्री को समस्याएं सुनाने आईं 5 गांव की पंचायत को सोमवार को मायूस ही लौटना पड़ा। 16 ग्राम पंचायतों के साथ कृषिमंत्री की मीटिंग में इन गांवों से 4-5 की संख्या में ही ग्रामीण आए थे। मंत्री ने कम लोगों के पहुंचने पर नाराजगी जताई। साथ ही उन्होंने यह कहते हुए मीटिंग स्थगित कर दी कि अगली बार 28 मई को गांव से ट्रॉली भरकर लेकर आना। तब समस्या सुनेंगे।

कृषि एवं पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने सोमवार को जिले के दीनबंधु छोटूराम ग्राम उदय योजना के तहत चयनित ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों से संवाद कर विकास कार्यों की घोषणा करनी थी। मीटिंग में जिले के कुल 16 ग्राम पंचायत से संवाद होना था। इस बीच मंत्री ने एक-एक गांव के प्रतिनिधियों को आगे आने के लिए बुलाया और अधिकारियों को काम शुरू करने के दिशा-निर्देश दिए।

बगैर नजर मिलाए निकल गए मंत्री

मीटिंग स्थगित होने के बावजूद मंत्री ने कुछ लोगों की समस्याएं सुनी, लेकिन और लोग शिकायत पत्र देकर मंत्री से गुहार करने लगे तो उनकी बात नहीं सुनी गई। अधिकांश मामलों में मंत्री ने शिकायत लेने के बाद फरियादी की तरफ देखना तक उचित नहीं समझा।

5 गांवों की बात नहीं सुनने पर सरपंचों ने जताई नाराजगी, बोले-कांग्रेसी विधायक के हलके के गांवों की बात नहीं सुनी

झज्जर. संवाद भवन में दीनबंधु छोटूराम ग्राम उदय योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों से सीधा संवाद करते मंत्री धनखड़।

कांग्रसी विधायक भुक्कल के हलके के 5 गांवों के नहीं हुए काम : बैठक में झज्जर जिले की सभी 4 विधानसभाओं के गांवों को शामिल किया गया है। यही कारण है कि बहादुरगढ़ हलके से विधायक नरेश कौशिक के 6 गांवों आसौदा सिवान, बामनौली, कानौंदा, कसार, लडरावन तथा मांडौठी की समीक्षा के दौरान वेमौजूद रहे। जिन गांव की पंचायत को भारी मन से उठकर जाना पड़ा वे झज्जर हलके के गांव हैं। जहां से कांग्रसी विधायक गीता भुक्कल विधायक हैं।

बीडीपीओ व सचिव ने नहीं दी थी ज्यादा लोग लाने की जिम्मेदारी : बिरोहड़ सरपंच

बिरोहड़ के सरपंच प्रदीप ने कहा कि उनको बीडीपीओ व ग्राम सचिव की ओर से 8-10 आदमी लेकर आने को कहा गया था। अब गर्मी का मौसम था, कम लोग आ पाए, लेकिन बादली हलके से भी कम ही लोग ही आए थे, उनके बारे में ऐसा नहीं कहा गया। उनके गांव का नाम लेकर मीटिंग स्थगित करना गलत था। वे भारी मन से मीटिंग से उठकर आए हैं। अगली जब भी मीटिंग कोगी, दो ट्रॉली आदमियों की भरकर लेकर जाएंगे।

दूसरे हलके के गांवों से भी ज्यादा लोग नहीं थे, भेदभाव क्यों किया : सरपंच

मातनहेल के सरपंच सतेंद्र सिंह का कहना है कि मीटिंग में 5 गांवों के साथ ऐसा मजाक होगा, इसकी उनको उम्मीद नहीं थी, बादली जो मंत्री का खुद का हलका है वहां से भी कोई अधिक लोग नहीं आए थे। मंत्री ने अगली बार 25 से 30 आदमी लेकर आने की बात कही है। इस बार वे 8 लोग थे, लेकिन अगली बार वे अकेले ही मीटिंग में हिस्सा लेंगे।

6 से अधिक नहीं बढ़ी पंचों की संख्या, बुलाए 25

जैसे-जैसे गांव की पंचायतों को पुकारा जा रहा था, तब मंत्री को ग्राम पंचायत की ओर से आने वाले प्रतिनिधियों की संख्या कम होना अखर रहा था। मंत्री ने समस्या सुनने से पहले हाथ खड़े कर पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या परखने का काम शुरू कर दिया, लेकिन जब तक बहादुरगढ़, बादली क्षेत्र सहित दूसरे क्षेत्र के गांव की समस्या सुनी जा चुकी थी। इसके बाद बहू गांव की बारी आई, तभी मंत्री ने हाथ खड़े करवाए तो यहां सरपंच सहित चार लोगों ने ही हाथ खड़े किए। इसके बाद बिरोहड़ गांव का नाम आया तो चार लोगों में से एक व्यक्ति ने अपने दोनों ही हाथ खड़े कर लिए। इस प्रकार मातनहेल, खानपुर खुर्द, ग्वालीसन के नाम लिए गए तो इनमें प्रतिनिधियों की संख्या छह से आगे नहीं बढ़ सकी। कुल मिलाकर मंत्री ने यह कहते हुए इन गांव की मीटिंग स्थगित कर दी कि अगली मीटिंग में 28 मई को 25 आदमियाें से कम न हो, ट्रॉली भरकर लाना, तब सुनी जाएगी समस्या।

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