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लाइब्रेरी की नहीं बनेगी नई इमारत, प्राचीन टाउन हॉल की 1 करोड़ से बदलेगी सूरत

3 वर्ष पहले
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शहर का पुस्तकालय अपने पुराने स्थान टाउन हॉल में रहेगा। इसके लिए अन्य किसी स्थान पर इमारत नहीं बनेगी। इसी स्थान पर एक करोड़ रुपए के बजट से ही पुरानी इमारत टाउन हॉल की सूरत बदली जाएगी। दरअसल प्रदेश स्तर पर सीएम ने ही इस पर हायर एजुकेशन विभाग से दिलचस्पी दिखाई थी कि पुस्तकालयों के भवन ठीक तरीके से होने चाहिए। जहां भवन नहीं है वहां इसे बनाया जाए। किराये के कमरों और दिए गए स्थान पर यह पुस्तकालय न चलें। झज्जर के लिए एक करोड़ रुपए का बजट पास हुआ है। प्रदेश मेें रोहतक, करनाल, गुरुग्राम, जींद, सिरसा, कुरुक्षेत्र और अंबाला में जिला पुस्तकालय के भवन बने हुए हैं।

विकास कार्यों के टेंडर लगे

झज्जर में सीएम की घोषणा के बाद 15 करोड़ रुपए से ज्यादा के विकास कार्य दो साल बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। हालांकि कुछ दिन पहले ही सभी विकास कार्यों के टेंडर लग गए हैं। अब खास यह है कि इनमें एक करोड़ रुपए के बजट से बनने वाला पुस्तकालय कहां बनेगा, इसके लिए अभी तक स्थान का चयन नहीं हो पा रहा था। इससे पहले यह तय था कि टाउन हॉल में ही पुस्तकालय की नई इमारत बनेगी। प्रारंभिक निष्कर्ष यह निकला कि यहां पार्किंग का अभाव रहेगा, जगह कम है, जबकि दूसरा विचार यह बना कि टाउन हॉल को गिराकर नए सिरे से इमारत बनाई जाए। हालांकि इस पर एतराज हुआ कि प्राचीन इमारत को देखते हुए यह संभव नहीं होगा। इसके बाद यह भी प्रस्ताव सामने आया कि पुस्तकालय का नया भवन जहांआराबाग स्टेडियम में बनाया जाए। इसमें में भी एक पेंच यह था कि जहांआरा बाग स्टेडियम नपा की जमीन नहीं है। ऐसे में जमीन ट्रांसफर में समय लगता है। अब सूचना मिली है कि सीएम की घोषणा के तहत पुस्तकालय भवन टाउन हॉल में रहेगा। यहां नई इमारत बनाने की बजाए पुरानी इमारत को नया लुक दिया जाएगा।

झज्जर में अंबेडकर चौक िस्थत पुस्तकलय में अध्ययन करते युवा।

फहराया था तिरंगा

लोगों ने टाउन हॉल को गिराने का विरोध किया। टाउन हॉल की ऐतिहासिकता जग-जाहिर है कि आजादी से पहले ही यहां क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों ने तिरंगा फहरा दिया था। इस वजह से भी यहां से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव है।

झज्जर के पुस्तकालय की अब नई इमारत नहीं बनेगी। पुराने स्थान पर जहां लाइब्रेरी है उसी स्थान को मरम्मत कार्य से बदलाव किया जाएगा। टाउन हॉल का प्राचीन निर्माण नहीं हटाया जाएगा। -निषिता बनर्जी, सीएम एडवाइजर, झज्जर

1910

में बनाई गई थी टाउन हॉल की इमारत



2007

से बाबू बालमुकुंद गुप्त के नाम से पुस्तकालय



13

हजार से ज्यादा है यहां किताबों की संख्या

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