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सिविल अस्पताल में दोपहर 2 बजे के बाद नहीं मिलेगी लिफ्ट की सुविधा, प्रबंधन बोला-होता है दुरूपयोग

3 वर्ष पहले
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शहर के 100 बेड के सिविल अस्पताल में बार-बार खराब होती लिफ्ट और मेनटेनेंस में होने वाले खर्च को देखते हुए सिविल अस्पताल प्रबंधन ने अब दोपहर दो बजे के बाद से लिफ्ट की सुविधा पर प्रतिबंध लगा दिया है। अस्पताल प्रशासन के इस नियम के बाद गर्भवती महिलाएं व आपरेशन शुदा महिलाओं और अन्य मरीजों को अब रैंप पर चलकर आना पड़ रहा है। मरीजों की स्थिति और दर्द मय तब हो जाती है जब उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिलता। सिविल अस्पताल में दो लिफ्ट लगी हुई हैं। अक्सर इनके खराब रहने की समस्या ही बनी रहती थी। अब बीते माह जब लिफ्ट सुधर गई है तो सबसे पहले सिविल अस्पताल प्रबंधन ने इसमें पहले की तरह एक आपरेटर बैठाया, ताकि लोग आपरेट नहीं कर पाने की स्थिति में इसके डिस्पले को बार-बार पुश न करके खराब न करें। ऐसा पहले होता आया है। आपरेटर की स्थाई तैनाती के अलावा सिविल अस्पताल ने अब ओपीडी के समय यानी दोपहर दो बजे के बाद से लिफ्ट की सुविधा पर बैन लगा दिया है।

झज्जर. सिविल अस्पताल की िलफ्ट नहीं चलने पर परिजनों के सहारे साथ आती गर्भवती व आपरेशनशुदा महिलाएं।

लिफ्ट ऑपरेटर से नहीं लिया जाता कोई काम

सिविल अस्पताल में लिफ्ट आपरेटर की तैनाती है। हालांकि इससे पहले और काम लिया जाता था। अब सिविल अस्पताल प्रबंधन ने लिफ्ट आपरेटर को उसका मूल काम ही पूरी तरह से सौंपा है। इसके बाद लिफ्ट में होने वाली गड़बडिय़ां भी कम हो गई हैं।

5 माह तक खराब पड़ी थी : सिविल अस्पताल में इससे पहले लिफ्ट दिसंबर 2017 से खराब पड़ी थी। कंपनी को कई बार सिविल अस्पताल ने पत्र लिए, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा था। मेनटेनेंस सर्विस को लेकर चल रहे पुराने इश्यू को लेकर कंपनी अपना इंजीनियर नहीं भेज रही थी। लिहाजा 5 माह बाद सिविल अस्पताल ने करीब 50 हजार रुपए का खर्चा करके दोनों लिफ्ट ठीक कराई थी।

विकलांग, वृद्ध और जरूरत मंद मरीजों की सुविधा को देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है। इससे बिजली की खपत भी ज्यादा होती थी। रही बात रैंप या सीढ़ी से गर्भवती महिलाओं समेत अन्य लोगों के आने का तो ऐसे मरीज अपने वार्ड में मदद मांगेगा तो उसे स्ट्रेचर व व्हील चेयर जरूर मिलेगी। -डाॅ. संजय सचदेवा, एसएमअाे

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