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जलघर सूखे, ग्रामीण 15 किलोमीटर से ला रहे पीने का पानी

3 वर्ष पहले
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शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। मनुष्यों के अलावा पशुओं को भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। पब्लिक हेल्थ का दावा है कि पानी का ये संकट दो दिन और रहेगा। इसके बाद सभी जलघर और जोहड़ भरने का काम होगा। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्र के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर शहर के जलघरों में पानी लेने आ रहे हैं। झज्जर में मुख्य तौर पर दो नहरों से पानी की सप्लाई होती है। एक जेएलएन और दूसरी गुड़गांव लिंक नहर। अब गुड़गांव लिंक नहर में तो 24 घंटे पानी चलता है। इस नहर से शहर के तीन मुख्य जलघर गुड़गांव रोड, सांपला रोड और पुराना तहसील रोड के जलघर हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र को पानी का कोई सकट नहीं है। हालांकि झज्जर के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र इनमें बादली, मातनहेल, बेरी व साल्हावास व झज्जर के कुछ गांव शामिल हैं वो जेएलएन नहर से जुड़े हैं। इस नहर में पानी न होने के कारण ये बुरे हालात जल संकट के बने हैं। बीते दिनों जब कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को जोहड़ों और जलघरों में पानी न आने की शिकायत सरपंचों से मिली तब यही मांग रखी गई कि ग्रामीण क्षेत्रों को जेएलएन की बजाए गुड़गांव नहर से जोड़ देना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने का पानी के लिए मचे हाहाकार को देखते हुए पब्लिक हेल्थ ने किसी प्रकार की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है। हालांकि नहर किनारे जो ट्यूबवैल व हैंडपंप बने हैं। उनसे ही विभाग जलघर भरने का काम कई स्थानों पर कर रहा है।

झज्जर. गुड़गांव रोड िस्थत जलघर पर लगे हैंडपंप पर पानी भरते लोग।

भास्कर न्यूज | झज्जर

शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। मनुष्यों के अलावा पशुओं को भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। पब्लिक हेल्थ का दावा है कि पानी का ये संकट दो दिन और रहेगा। इसके बाद सभी जलघर और जोहड़ भरने का काम होगा। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्र के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर शहर के जलघरों में पानी लेने आ रहे हैं। झज्जर में मुख्य तौर पर दो नहरों से पानी की सप्लाई होती है। एक जेएलएन और दूसरी गुड़गांव लिंक नहर। अब गुड़गांव लिंक नहर में तो 24 घंटे पानी चलता है। इस नहर से शहर के तीन मुख्य जलघर गुड़गांव रोड, सांपला रोड और पुराना तहसील रोड के जलघर हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र को पानी का कोई सकट नहीं है। हालांकि झज्जर के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र इनमें बादली, मातनहेल, बेरी व साल्हावास व झज्जर के कुछ गांव शामिल हैं वो जेएलएन नहर से जुड़े हैं। इस नहर में पानी न होने के कारण ये बुरे हालात जल संकट के बने हैं। बीते दिनों जब कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को जोहड़ों और जलघरों में पानी न आने की शिकायत सरपंचों से मिली तब यही मांग रखी गई कि ग्रामीण क्षेत्रों को जेएलएन की बजाए गुड़गांव नहर से जोड़ देना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने का पानी के लिए मचे हाहाकार को देखते हुए पब्लिक हेल्थ ने किसी प्रकार की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है। हालांकि नहर किनारे जो ट्यूबवैल व हैंडपंप बने हैं। उनसे ही विभाग जलघर भरने का काम कई स्थानों पर कर रहा है।

पानी के टैंकरों की बढ़ी मांग

ग्रामीण क्षेत्रों में मीठे पानी की सप्लाई बीते एक सप्ताह से न होने के कारण पानी का टैंकर का व्यापार करने वालों की डिमांड बड़ गई है। एक टैंकर 500 रुपए तक बिक रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग आपसी तौर पर चंदा एकजुट करके टैंकर मंगा रहे हैंं।

नहर नहीं आने से बने

बुरे हालात

झज्जर के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में जेएलएन नहर से जलघरों और जोहड़ों में सप्लाई दी जाती है। अब जेएलएन नहर में पानी 9 मई को आना था, लेकिन अब तक नहीं आया। अब 20 मई को पानी आने की बात कही जा रही है। लिहाजा जोहड़ों से लेकर जलघरों तक इसका असर देखने को मिल रहा है। जिले के कासनी गांव निवासी कीकर सिंह ने बताया कि वो पिछले सात दिनों से रोजाना गांव से 15 किलोमीटर दूर बाइक से पानी लेने झज्जर शहर में आ रहा है। इसके लिए वो रोजाना 30 किलोमीटर बाइक चलाकर पानी लाता है। इसके बाद अगले दिन फिर पानी के लिए दौड़ना पड़ता है।

20 मई को नहर में पानी आने की संभावना है इसके बाद ग्रामीणों को पानी की समस्या नहीं आने दी जाएगी। पानी सुचारू और पर्याप्त मिल सकेगा। आरपी वशिष्ठ, कार्यकारी अभियंता जन स्वास्थ्य विभाग

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