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अब रोशन होंगे चौक-चौराहे, 38 हाईमास्ट लाइटों के खराब पार्ट बदलने को बजट देगी नगर पालिका

3 वर्ष पहले
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नगर पालिका क्षेत्र में लगी 38 हाईमास्ट लाइटों के ठीक होने की राह कई महीन से चल रहे विवाद के बाद सुलझ गई है। हाईमास्ट लाइट में जो भी तकनीकी समस्या इसके खराब पार्ट को लेकर थी वो पार्ट नया लगेगा। इसका भुगतान बिजली ठेकेदार को अतिरिक्त तौर पर किया जाएगा। लाइट ठेकेदार और नपा के इस नए सुलहनामे के बाद अब शहरभर की लाइटों को शनिवार से ही ठीक करना शुरू कर दिया है।

नपा के नए आदेश के तहत बिजली ठेकेदार वीरेंद्र सिंह उर्फ गुल्लू गुर्जर को कहा गया है कि शहर की सभी खराब हाईमास्ट का वन टू वन सर्वे कर इन्हें जल्द से जल्द चालू किया जाए। इसके तहत एक-एक हाईमास्ट को उतारकर इसके सभी लाइट उपकरण चेक करने को कहा गया है। इसका जो मशीनी पार्ट मरम्मत हो सकता है, उसे ठेकेदार करेगा। वही, जो पार्ट ठीक होने की बजाए नया लगेगा, उसका भुगतान सहमति के बाद ठेकेदार को दिया जाएगा।

अब तक ठेकेदार लाइटों को ही करता था ठीक, यदि पार्ट बदलना पड़ जाता तो नहीं हो पाती थी मरम्मत, अब मिलेगी राहत

झज्जर. बादली रोड िस्थत शहीद कुलदीप चौक पर लगी हाईमास्ट लाइट को उतरवाकर चैक कराते नगर पालिका के वाइस चेयरमैन प्रवीण गर्ग व अन्य लोग।

ठेके का विरोध कर रहे पार्षद

नपा ने शहरी क्षेत्र की सभी 38 हाईमास्ट और ढाई हजार के करीब स्ट्रीट लाइटों के मरम्मत का ठेका 96 हजार रुपए का दिया हुआ है। पार्षदगण इस ठेके का विरोध करते रहे हैं। हालांकि और कोई समाधान न निकलने पर यह सिलसिला अब तक चल रहा है। ठेका अन्य शहरों की अपेक्षा कम है। लिहाजा नपा की सहमति भी मिली हुई है।

बिजली ठेकेदार को कहा गया है कि हाईमास्ट लाइट चालू करने के लिए जो भी नई चीज लगनी है वो लगाए। इसका भुगतान कर दिया जाएगा। हाईमास्ट में जो भी रीप्लेस होगी उसकी तस्दीक क्षेत्र के पार्षद और शिकायतकर्ता से कराई जाएगी। इसके बाद ही ठेकेदार को भुगतान होगा। -प्रवीण गर्ग, वाइस चेयरमैन नपा झज्जर

नए उपकरण न होने से खराब हाईमास्ट नहीं हो पाती थी ठीक

अब तक शहर की खराब हाईमास्ट के ठीक होने की स्थिति यह थी कि शहर के पार्षदों के अलावा, सामाजिक संगठन नपा को अपने क्षेत्र में हाईमास्ट लाइट नहीं जलने की बात कहते थे। शिकायत आने पर नपा के अफसर लाइट मरम्मत ठेकेदार को नोटिस जारी करते थे। ठेकेदार अपनी साख बचाने के लिए किसी अन्य हाईमास्ट के सही उपकरण शिकायतकर्ता की बताई हाईमास्ट के खराब उपकरण में बदल देेता था। हालांकि इससे काम नहीं चल रहा था। दरअसल ठेकेदार सिर्फ मरम्मत का काम करने तक सीमित था। नई लाइट के उपकरण नहीं लगने से वर्षों पहले से लगी खराब हाईमास्ट ठीक ही नहीं हो पाती थी। लिहाजा स्ट्रीट लाइट को ही चालू रखा जा रहा था।

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