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बारिश में खराब गेहूं एजेंसी ने लेने से किया मना, आढ़तियों ने मुआवजा मंागा

3 वर्ष पहले
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बारिश के कारण रविवार को मंडी में गेहूं भीग गया था। सोमवार और मंगलवार को मौसम साफ रहने के बावजूद मंडी से गेहूं के उठान की व्यवस्था नहीं बन सकी है। इस बीच अधिक समय तक गेहूं भीगा रहने के कारण वह सड़कर काला पड़ गया है। कई जगह इसके अंदर से बदबू भी आनी शुरू हो गई है। इसी बीच खराब हुए गेहूं के रखरखाव की जिम्मेदारी खरीद एजेंसी ने आढ़तियों पर डाली है। इस पर आढ़तियों ने खराब हुए गेहूं का आंकलन कर इसके लिए मुआवजा दिए जाने की मांग प्रशासन से की है।

केंद्रीय भंडारण के लिए जिले में गेहूं की खरीद का कार्य हैफेड, हरियाणा स्टेट वेयर हाउस कारपोरेशन व एफसीआई की ओर से किया गया। इसमें अधिक खरीद हैफेड की ओर से की हुई, लेकिन भारी बंपर आवक होने के कारण खरीद से लेकर उठान तक की कार्रवाई में समय लगा। इस बीच मौसम ने भी खरीद कार्य को बीच-बीच में प्रभावित रखा। अब स्थिति यह है कि मंडी में करीब 70 हजार क्विंटल गेहूं है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक इसको हैफेड ने खरीद तो लिया है, लेकिन इसका उठान बारदाना न होने के कारण नहीं हो सका है। खरीद एजेंसी का कहना है कि खरीद से पहले आढ़तियों को बता दिया गया था कि गेहूं की खरीद तो की जा रही है, लेकिन इसके लिए बारदाना आने में कुछ समय लग सकता है, लिहाजा बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए आढ़ती जब तक गेहूं उठ न जाए, मंडी में इसे बचाकर रखें। अब 13 मई को बारिश से बचने के लिए गेहूं को ऊपर से तो ढक दिया, लेकिन नीचे से पानी जाने के कारण वह खराब होने लगा। आढ़ती लेबर की मदद से लगातार दो दिनों से खराब गेहूं को अलग करने में लगे हैं।

अव्यवस्था की वजह से अनाजमंडी में खराब हो रहा गेहूं, एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी, अनाजमंडी में पड़ा 70 हजार क्विंटल गेहूं

झज्जर. अनाजमंडी में बरसात के बाद भरे पानी को पंप लगाकर निकाला गया।

कट्टाें को भी एजेंसी ने नहीं उठाया : धनखड़

मंडी प्रधान नरेंद्र धनखड़ ने कहा कि है कि अनाज मंडी में बारिश के कारण आढ़तियों को भारी नुकसान हुआ है। यदि आढ़तियों को समय पर बारदाना उपलब्ध हो जाता, तब गेहूं का उठान भी हो जाता, लेकिन जो गेहूं कट्टों में रखा है, उसको भी उठाया नहीं जा सका। आढ़तियों ने खराब हुए गेहूं को अलग से स्टॉक करने का फैसला किया है। साथ ही इस मामले में प्रशासन से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग रखी जाएगी। जब बर्बाद फसल का मुआवजा मिलता है तो आढ़तियों के नुकसान की भी भरपाई की जाए।

पहले बता दिया था मौसम

खराब होगा : हैफेड

हैफेड डीएम सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि मौसम खराब होने की सूचना आढ़तियों को पहले ही दे दी थी। आढ़ती ढाई फीसदी आढ़त लेते हैं। वह इसलिए है कि गेहूं को बेहतर तरीके से झार आदि लगाकर सुखाकर रखें। गेहूं को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उनकी ही थी, अब यदि गेहूं खराब हुआ है तो इसको एजेंसी नहीं लेगी। यह खामियाजा आढ़ती को ही भुगताना होगा।

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