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पूरे प्रदेश के अफसरों ने जिस निमाना में बैठकर विकास की योजना तैयार की, वहां पानी की समस्या दूर नहीं करवा सके

3 वर्ष पहले
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झज्जर | जिले में पीने के पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। अब हालात यह हैं कि जिस निमाना गांव में प्रदेशभर के 22 जिलों के एडीसी और विकास कार्यों से जुड़े दूसरे उच्च अधिकारियों ने कृषि मंत्री के आह्वान पर बैठक की थी, वहां पीने के पानी का प्रबंध नहीं हो सका है। गांव के सरपंच अनिल ने कहा कि गांव में समस्या की दिशा में कोई समाधान नहीं हुआ। इतनी बड़ी विकास की बैठक से भी गांव में कोई भला नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि निमाना और साथ लगते गांव सौंधी में ग्रामीणों के लिए पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। पशुओं के तलाब तक सूखे हैं। पीने के पानी की समस्या के कारण अब लोग निजी पानी आपूर्ति करने वाले टैंकर संचालकों पर निर्भर हैं। यहां नहरी पानी उपलब्ध करवाने में दो बड़ी बाधाएं हैं। निमाना व सौंधी में पानी की आपूर्ति पेलपा गांव की तरफ से होती है। सप्लाई लाइन गांव के बीच से गुजरने के कारण वहां लोगों ने अवैध कनेक्शन किए हैं। इसके कारण दिन में बिजली आपूर्ति के संकट के बीच जो डेढ़ घंटे आपूर्ति छोड़ी जाती है, उसका भी कोई लाभ नहीं मिल पाता है। गांव की सप्लाई लगातार चलने वाली एनसीआर नहर से होने के बावजूद यहां पानी की किल्लत है।



झज्जर. िकल्डौद गांव का सूख रहा जलघर।

यह तो ठीक करवा दो... किल्डौद

में मेन पाइपलाइन 6 माह से लीक

किल्डौद गांव के नंबरदार रामकुमार, श्रीनिवास, यशपाल व राजेश ने बताया कि उनके गांव में तीन दिन में पानी मिलता है, लेकिन अब चार दिन में आना का भी भरोसा नहीं है। गांव में दो वाटर टैंक हैं, लेकिन पानी नहीं है। गांव के स्टेडियम के पास मेन पाइपलाइन छह महीने से लीक कर रही है। दस फुट चौड़ा और ढाई फुट गहरा गड्ढा बना है। शिकायत के बावजूद समाधान नहीं है। अब पीने के पानी की व्यवस्था खेतों के ट्यूबवेलों व मंदिर के पंप से करनी पड़ती है।

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