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डीसी का दखल रोकने एकजुट हुए नप चेयरमैन

3 वर्ष पहले
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प्रदेश भर की स्थानीय निकाय से जुड़े प्रतिनिधि अब सरकार से अपना सीधा हस्तक्षेप चाहते हैं। नगर पालिका और नगर परिषद अपने क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के लिए डीसी आॅफिस के अधीन न रहे, इसके लिए पहली बार प्रदेश स्तर पर आवाज उठी है। घरौंडा में शनिवार को प्रदेशस्तरीय बैठक में झज्जर से भी चेयरमैन और वाइस चेयरमैन ने शिरकत की।

अभी तक की व्यवस्था में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पार्षदों के साथ मिलकर जो भी विकास कार्य पास करते हैं, उसकी मंजूरी डीसी आॅफिस से लेना पड़ती है। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इस नियम के तहत विकास कार्य महीनोंं तक अटके रहते हैं। साथ ही इनके रद्द होने की भी आशंका बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय निकाय से जुड़े प्रतिनिधि डीसी आॅफिस की दखलंदाजी नहीं चाहते। जनप्रतिनिधियों को इस बात पर भी एतराज है कि स्थानीय निकाय से संबंधित सरकारी जानकारी भी उन्हें देरी से मिलती है। इसके अलावा छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला प्रशासन के अफसरों की ओर देखना पड़ता है। नपा के जनप्रतिनिधियों का ग्रांट बढ़ाए जाने पर भी चर्चा हुई ताकि चेयरमैन अपने स्तर पर वार्डों में विकास कार्य करवा सकें। लिहाजा जनप्रतिनिधि अब सीएम से इन सब मुद्दों को लेकर मिलेंगे।

प्रदेश के नगर परिषद व पालिकाओं के चेयरमैन अौर वाइस चेयरमैनों ने की बैठक
ये प्रस्ताव रखेंगे
नपा के विकास कार्यों के प्रस्ताव की मंजूरी डीसी आॅफिस से नहीं की जाए।

चेयरमैन का मानदेय 6700 व पार्षदों का 4500 रुपए है, इसमें वृद्धि की जाए।

नगर पालिका में अफसरों की दखलंदाजी बंद की जाए।

चेयरमैन की पावर 5 लाख रुपए की है, इसे कम से कम 10 लाख रुपए हो।

नपा की समूची माॅनीटरिंग चेयरमैन करें।

अब प्रदेशभर के नगर पालिका व नगर परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन स्थानीय निकाय से सीधे सरकार का हस्तक्षेप करने और डीसी आफिस की दखलंदाजी खत्म करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। जल्द ही स्थानीय निकायों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिलेगा। - प्रवीण गर्ग, कार्यवाहक चेयरमैन झज्जर नपा

ऑफिसों की सफाई में लगे हैं 40 कर्मचारी
यह भी बताया गया कि झज्जर की नगर पालिका मौजूदा समय में डीसी आफिस पर भी महीने में करीब ४ लाख रुपए का खर्च करती है। दरअसल डीसी आफिस व अन्य कार्यालयों में नपा की ओर से 4० सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। इनका जो वेतन होता है वो ४ लाख रुपए महीने का बनता है। सदन की बैठक में भी पार्षद इस बात का विरोध करते रहे हैं कि चार लाख का खर्च डीसी आफिस पर हो रहा है।

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