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9 दिन में आया धर्मकांटे में 55 किलो का अंतर वेयर हाउस को 250 क्विंटल गेहूं का नुकसान

3 वर्ष पहले
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खरीद के बाद गोदाम में भेजे जाने वाले गेहूं के तोल में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही थी। इसके चलते शहर के चार धर्मकांटों की जांच प्रशासन की ओर से नियुक्त कमेटी से कराई गई। वेयर हाउस का धर्मकांटा 55 किलो अधिक तोलता हुआ मिला, जबकि इसी धर्मकांटे की जांच सरकारी तौर पर 9 दिन पहले हो चुकी थी। अब वेयर हाउस के स्टाफ का कहना है कि इससे उनको 250 क्विंटल गेहूं का चूना लगा है। इसकी कीमत करीब साढ़े 4 लाख रुपए है। अब उच्चाधिकारियों से इसकी भरपाई के लिए निर्देश मांगे जाएंगे। वहीं, हैफेड का कहना है कि अब बाहर के कांटों का तोल मान्य नहीं होगा। विभाग के कांटे से ही गेहूं स्वीकार किया जाएगा।

दो धर्म कांटों का कैलीब्रेशन कर वजन ठीक करवाया : मंडी में ढेरियां के हिसाब से बोली न होने के कारण किसान समूची ट्रॉली का वजन कर इसको अपने आढ़ती के पास डाल जाता है। आढ़ती इस गेहूं का हिसाब किसान के साथ धर्मकांटे की पर्ची के हिसाब से करता है। इस बीच आढ़तियों को शिकायत थी कि सरकारी एजेंसी की ओर से किए जा रहे तोल में अंतर है। इसके बाद जांच में हैफेड के तलाव गोदाम स्थित गोदाम और कच्चा बादली रोड के सीया राम धर्मकांटों का वजन सही मिला। वहीं, गुरुग्राम रोड स्थित वेयर हाउस और रेवाडी रोड के धर्मकांटे में 50 से 55 किलो वजन अधिक तोलते हुए मिला। टीम ने अब दोनों की एक-दूसरे के कांटे से कैलीब्रेशन कर दी है ताकि वजन में अंतर न आए। प्रशासन ने दोनों को चेतावनी दी है।

कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को

अवगत करवाएंगे : वेयर हाउस
वेयर हाउस के मैनेजर अजय बैनीवाल का कहना है कि तोल के मामले में उनका कोई कसूर नहीं है। इससे पहले मापतोल विभाग के दिलबाग कादियान की ओर से 3 अप्रैल को धर्मकांटे की जांच कर इसको सील किया गया था। बाद में शिकायत के बाद जब 12 अप्रैल को दोबारा से जांच हुई तो इसमें 55 किलो अधिक तोलता हुआ मिला। ऐसे में उनको 500 गाड़ियों में अंतर मिला, जिसके कारण 250 क्विंटल का अंतर है। इस तरह से करीब साढ़े 4 लाख रुपए का लॉस है। इसके लिए अब ऊपर अधिकारियों को लिखा जा रहा है।

20 से 25 किलो की मिलती है कमी : डीएफएसई अशोक शर्मा ने बताया कि माप की जिम्मेदार मापतोल विभाग की रहती है। बड़े काटों में 20 किलो की कमी मिल जाती है। कांटे पर लोड़ वाले ट्रक से अचानक ब्रेक लेने से भी बैलेंस खराब हो जाता है। लोकल लेवल पर जांच में अंतर आने पर अंबाला से टीम बुलाई गई थी। इसमें किसानों और आढ़तियों को कोई लॉस नहीं है। गोदाम में आढ़तियों की ओर से जो गेहूं आ रहा था, उसका वजन कम था, लेकिन तोल अधिक बताया जा रहा था। इस व्यवस्था में लॉस एजेंसी को है। वहीं, इस मामले में जब मापतोल विभाग के अधिकारी दिलबाग कादियान को बार-बार फोन किए गए, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

मैं मापतोल के दौरान प्रशासन की कमेटी में था। कैलीब्रेशन के बाद धर्मकांटा सील किया जाता है। इलेक्ट्राॅनिक्स कांटों का पासवार्ड भी मापतोल विभाग के पास रहता है। आढ़तियों का भ्रम दूर हो गया है। हमारे कांटे में किसी प्रकार की कमी नहीं मिली। अब बाहर के कांटों का तोल मान्य नहीं होगा। विभाग के कांटे से ही गेहूं स्वीकार किया जाएगा। -सुरेंद्र चौधरी, डीएम, हैफेड, रोहतक-झज्जर।

आढ़तियों ने ट्रांसपोर्टर से माफी मांगी, लोडिंग शुरू
झज्जर. अनाज मंडी में मौसम खुलने के बाद सूखने के लिए रखा गेहूं।

भास्कर न्यूज | झज्जर

झज्जर की अनाजमंडी में अनाज उठाने को लेकर हुए आढ़तियों और ट्रांसपोर्टर के बीच उपजा विवाद खत्म हो गया है। शुक्रवार देर रात एसडीएम रोहित यादव की मौजूदगी में दोनों को चेतावनी दी गई। इसके चलते शनिवार को उठान का काम सुचारू रूप से चला। एसडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसान हित में किसी भी रूप से लोडिंग का काम बंद नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा होगा तो टेंडर रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कथित रूप से दुर्व्यवहार करने के वाले आढ़तियों के लाइसेंस रद्द करने जैसे कठोर एक्शन की बात कही। हैफेड डीएम, डीएफएसई व मंडी प्रधान सहित अन्य लोगों की मौजूदगी में इस मामले को हल कर लिया गया।

मंडी प्रधान नरेंद्र धनखड़ ने बताया कि एसडीएम व दूसरे अधिकारियों ने इस बात के समाधान के लिए करीब सवा घंटे तक बैठक की और दोनों ही पक्षों की बात सुनी। बाद में आढ़तियों को इस बात के लिए कहा गया कि सीनियर सिटीजन के रूप में ट्रांसपोर्टर का सम्मान करना चाहिए था, लेकिन गलती मान लेने के बाद इनके हाथ मिला दिए गए।

ट्रांसपोर्टर ने उच्चाधिकारियों को भेजी थी शिकायत

शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव के दौरे के बाद दो आढ़तियों ने ट्रांसपोर्टर के साथ कथित रूप से गाली-गलौच कर हाथापाई की। इस बीच ट्रक चालकों ने बीच-बचाव कर ट्रांसपोर्टर को बचाया। विरोध में लोडिंग का काम बंद कर दिया गया, जिसके कारण मंडी का काम प्रभावित हुआ। ट्रांसपोर्टर महेंद्र गोयल की ओर से अपने साथ हुए विवाद की शिकायत एसडीएम व डीसी सहित अन्य खरीद अधिकारियों को भी भेजी है। जिसका एसडीएम रोहित यादव ने हल निकाल दिया और किसान हित में काम करने के निर्देश दिए। वहीं ट्रांसपोर्टर गोयल का कहना है कि जब दूसरे पक्ष ने अपने व्यवहार पर माफी मांग ली है, तब इस मामले को आगे ले जाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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