पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • 5 वर्ष में 3 हजार पशुओं के पेट से निकाली 1.5 लाख किलो पॉलीथिन, सिक्के और कीलें

5 वर्ष में 3 हजार पशुओं के पेट से निकाली 1.5 लाख किलो पॉलीथिन, सिक्के और कीलें

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
प्रशासनिक लापरवाही की वजह से स्ट्रे कैटल फ्री सिटी का दावा सिर्फ कागजों में ही दिखाई दे रहा है। अब भी सड़क पर बेसहारा गोवंश भटक रहा है। वहीं, पॉलीथिन बैन होने के बावजूद धड़ल्ले से यह बाजार में बिक रहा है। लाेगों द्वारा फेंकी गई पॉलीथिन खाकर गोवंश बीमार पड़ रहा है। यह जानलेवा भी साबित हो रहा है। झज्जर के दादरीतोए स्थित प्रदेश के पहले गो प्राकृतिक चिकित्सालय में मात्र 5 वर्ष के अंदर 3 हजार से ज्यादा गोवंशों के पेट से लगभग डेढ़ लाख किलो पाॅलीथिन, कील व प्लास्टिक का सामान निकाला जा चुका है।

पॉलीथिन एक जहर : 2 दिन पहले एक सांड के पेट से निकली 152 किलो पॉलीथिन और लोहे का स्क्रैप, ऑपरेशन न होता तो चली जाती जान

लोहा, पॉलीथिन, सिक्के... सब खा रहा गोवंश... सांड के पेट से निकाली पॉलीथिन व लोहा।

पशुओं की आंतों में फंस जाती है पॉलीथिन, तिल-तिलकर मरते हैं

पशु चिकित्सक डाॅ. दिनेश ने बताया कि पाॅलीथिन तो इन पशुओं के लिए इस कदर जानलेवा है कि ये इन्हें तिल-तिलकर मारने जैसा काम करती है। पाॅलीथिन गोवंश की आंतों में फंस जाती हैं। इससे इनका समूचा पाचन तंत्र गड़बड़ हो जाता है। ये कुछ चरते भी हैं तो पच नहीं पाता। इनका पेट फूलता रहता है।

एक सांड के पेट से 160 किलो तक पॉलीथिन निकाल चुके हैं

बहादुरगढ़ से 31 जुलाई को आए एक नंदी के पेट से 152 किलो पाॅलीथिन व 70 ग्राम लोहे का स्क्रैप आॅपरेशन करके निकाला था। यह ऑपरेशन करीब 4 घंटे तक चला। इस तरह इस नंदी की जान बचा ली गई। नंदी का आॅपरेशन करने वाले डाॅ. दिनेश और प्रवीण ने बताया कि अगर यह नंदी ददारीतोए गो अस्पताल नहीं आता तो 7 दिन में ही सड़क पर मौजूद रहकर इसकी जान चली जाती। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में सबसे ज्यादा 160 किलो पाॅलीथिन एक नंदी के पेट से ही 4 महीने पहले निकाली गई थी, जो अब तक रिकाॅर्ड है। संचालक सुनील निमाण ने बताया कि अस्पताल के पास 11 एबुलेंस हैं। 200 किलोमीटर के दायरे में मौजूद बीमार व असहाय गोवंश का उपचार किया जा रहा है।

पिछले वर्ष 475 गोवंश पकड़े थे

मई 2017 से हमने शहरी क्षेत्र से 475 गोवंश को पकड़कर गाेशालाओं के हवाले किया था। शहर स्ट्रे कैटल फ्री हो गया था। अब करीब 200 गोवंश दोबारा से सड़क पर आ गए हैं। अब जिला प्रशासन के अफसरों से बात करके इस बारे में कोई न कोई हल निकाला जाएगा। - नरेंद्र सैनी, सचिव, झज्जर नगर पालिका

खबरें और भी हैं...