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मां-बाप को प्रताड़ित करने वाले पुलिस को देख हुए सीधे, 67 में से 66 सेवा को राजी हुए

3 वर्ष पहले
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पुलिस विभाग का सीनियर सिटीजन सेल बुजुर्गों के खिलाफ होने वालेे अपराधों को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। परिवार द्वारा बुजुर्ग मां-बाप काे तंग करने की इस वर्ष 67 शिकायतें आ चुकी हैं, जिनमें से 66 का समाधान हो गया। बच्चों ने अपनी गलती मानी और बुजुर्गों की सेवा करने को राजी हो गए। एक केस में बेटे के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 24 शिकायतें अभी तक कम आई हैं।

सेल प्रभारी मोहनलाल ने बताया कि अधिकांश मामलों में बुजुर्ग को खाना न देने, घर से निकाल देने की शिकायत रहती है। जांच में यह पता चला कि 60 फीसदी से अधिक मामलों में बुजुर्ग की बेटों की बजाय बहुओं से शिकायत रही है। इनका कहना है कि एक मामले में बुजुर्ग की पिटाई की शिकायत मिली है। इस पर पहले बुजुर्ग का मेडिकल कराया गया। इसके बाद सीधे पुत्र के खिलाफ केस दर्ज किया।

पुलिस की सीनियर सिटीजन सेल में बुजुर्ग मां-बाप के उत्पीड़न की पिछले वर्ष के मुकाबले 24 शिकायतें कम दर्ज हुईं

हर माह बुजुर्गों से मिलकर लेते हैं फीडबैक

जांच अधिकारी मोहनलाल ने बताया कि वे प्रत्येक महीने 25 से 30 तारीख के बीच बुजुर्गों से मिलते हैं। सीनियर सिटीजन से शिकायत संज्ञान में आने पर जांच करते हैं। ऐसे में उनको बुजुर्ग के घर का पता रहता है। बाद में जब भी किसी अन्य शिकायत के संबंध में निरीक्षण करना होता है, तब अन्य दूसरे बुजुर्गों के बारे में पूछताछ के लिए उनके घर पर पहुंच जाते हैं। तब सभी बुजुर्ग खुश मिलते हैं। उन्होंने बताया कि सभी थाना और चौकियों के अलावा अस्पताल में अपना मोबाइल नंबर 8930879916 दे रखा है। अस्पताल से कई बार फोन आने पर बुजुर्ग को अपने खर्च से बिस्कुट व फल आदि देकर आते हैं, जबकि किसी बुजुर्ग की शिकायत मिलती है, तब वे उनके रिश्तेदारों और पड़ोसियों के नंबर ले लेते हैं। इस प्रकार जब ये सब लोग बैठते हैं, तब सामाजिक रूप से समस्या का हल निकल जाता है।

मोहनलाल, प्रभारी सीनियर सिटीजन सेल, झज्जर

तीन बेटे होने पर भी दुखी

केस 1 :
छारा की बुजुर्ग महिला छोटे लड़के के पास रहती थी, लेकिन उसे घर से निकाल दिया। वह मायके चली गई। शिकायत आई तब पता चला कि बुजुर्ग महिला के तीन बेटे हैं। इसके बाद तीनों लड़कों को तलब किया। तब बीच वाला बेटा बुजुर्ग को साथ रखने के लिए तैयार हो गया। अब बुजुर्ग खुश है।

मकान बेचकर बहू करना चाहती थी बेघर

केस 3: बुपनिया की बुजुर्ग महिला के तीन बेटे थे। उसके पति नहीं है। तीनों बेटों की मौत हो गई। घर पर एक बेटे की पुत्रवधु थी, वह मकान बेचकर जाना चाहती थी। इसके लिए गांव के किसी व्यक्ति ने बयाना भी कर दिया था। बुजुर्ग कहां रहे इसकी समस्या पैदा हो गई। शिकायत मिलने पर बुजुर्ग को मकान दिलाकर बयाना वापस कराया।

मां के 39 लाख रुपए हड़पे

केस 2: छपार गांव की बुजुर्ग महिला के नाम मायके में जमीन थी। यह जमीन महिला ने 39 लाख रुपए में बेच दी। बाद में बेटे ने बैंक में संयुक्त अकाउंट खुलाकर रुपए अपनी प|ी के खाते में डाल दिए। बुजुर्ग को घर से निकाले जाने की शिकायत पर बेटे को तलब किया। बुजुर्ग को पैसे भी दिलाए गए और उसको घर में जगह भी दिलाई।

बेटे से दिलवाया 2 हजार रुपए खर्च

केस 4 :
कडौदा में बुजुर्ग पिता को घर से निकाल दिया। शिकायत संज्ञान में आने पर पुलिस ने बेटे को बुलाया। दोनों तरफ की बात सुन बुजुर्ग को घर में जगह दिलाई। उसकी पेंशन नहीं थी, पेंशन भी चालू कराई। इसके अलावा बेटे से 2 हजार रुपए हर महीने खर्चा दिलवाना शुरू कराया। अब वह परिवार से संतुष्ट है।

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