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5 में से 2 यूनियन नहीं मानीं तो झज्जर में विफल हुई रोडवेज की हड़ताल, बहादुरगढ़ में रहा चक्का जाम

3 वर्ष पहले
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रोडवेज की राज्यव्यापी हड़ताल झज्जर में कर्मचारी यूनियनों में फूट की वजह से सिरे नहीं चढ़ी। झज्जर में एक भी बस का चक्का जाम कर्मचारी संगठन नहीं करा सके। पांच में से 3 यूनियन हड़ताल के समर्थन में थी, जबकि दो ने विरोध कर बसें चलाने का ऐलान किया। इस वजह से दूसरे कर्मचारियों को बसें चलाता देखकर टकराव टालने के लिए बाकी यूनियन ने भी काम किया। हालांकि दूसरे डिपो की बसें नहीं आने की वजह से सवारियों को परेशानी का सामना जरूर करना पड़ा।

उधर, बहादुरगढ़ में हड़ताल सफल रही। 52 बसों के पहिये थमे रहे। दिल्ली की बसें भी बहादुरगढ़ में नहीं आईं। वे टिकरी बॉर्डर पर ही रुक गईं। इस वजह से निजी बसों व मेट्रो का यात्रियों ने सहारा लिया। मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 को रद्द कराने की मांग और 700 बसें किराए पर लेकर चलाने के विरोध में इस हड़ताल की घोषणा की गई थी।

सभी 95 बसें रूट पर चलीं

हड़ताल का एेलान एसकेएस, इंटक और महासंघ ने किया था। इन तीनों ही यूनियन के कार्यालय झज्जर डिपो में हैं। हड़ताल के संबंध में पर्चे छपवाकर चस्पा कर दिए गए थे। गेट मीटिंग भी चल रही थी। हालांकि झज्जर डिपाे में दो अन्य कर्मचारी संगठन बीएमएस व ऑल हरियाणा कर्मचारी संघ ने एेलान किया कि वे हड़ताल में शामिल नहीं हैं। काफी संख्या में चालक व परिचालक भी इन दोनों संगठनों से जुड़े हैं। लिहाजा बाकी संगठनों को भी कदम पीछे हटाने पड़े। रुटीन की तरह सुबह 5 बजे से झज्जर डिपो की सर्विस दिल्ली, जयपुर व चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई। झज्जर डिपो में कुल 111 बसें हैं। इनमें से रुटीन में 95 बसें रूट पर दौड़ती हैं और इतनी ही बसें हड़ताल वाले दिन चली।

झज्जर. कर्मचारी यूिनयन की आपसी फूट के कारण झज्जर बस स्टैंड के बूथ पर लंगी बसें।

सोमवार रात को ही बन गई थी हड़ताल को विफल करने की रणनीति

इंटक के प्रधान बोले-मजबूरी में चलानी पड़ीं बसें

हड़ताल का कॉल करने वाली इंटक की झज्जर यूनियन डिपो के प्रधान विजय माजरा ने कहा कि सफल चक्का जाम की उम्मीद कर रहे थे। सभी संगठनों सेे आह्वान भी किया गया था कि जायज मांगों को लेकर हड़ताल में शामिल हों। माजरा ने कहा कि हालांकि मंगलवार को जब लगा कि कुछ यूनियन से जुड़े कर्मचारी बसें चला रहे हैं तब टकराव से बचने के लिए हमारे साथियों ने भी बसें चलाईं।

बीएमएस प्रधान बोले-हमने हड़ताल नहीं होने दी

बीएमएस से संंबंधित हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ 1342 के झज्जर डिपो प्रधान रामवीर फौजी ने कहा कि हड़ताल का कुछ कर्मचारी संगठनों ने शोर-शराबा जरूर किया था, लेकिन बीएमएस से जुड़े 60 से ज्यादा कर्मचारियों को लेकर सोमवार रात को ही रणनीति बना ली गई थी। फैसला लिया था कि भले ही ओवरटाइम करना पड़े, लेकिन हर जरूरी रूट पर बसें अपने निर्धारित समय से ही यात्रियों की सुविधा के लिए रवाना करनी है। रामवीर बोले कि हमारी यूनियन की रणनीति की वजह से बाकी को भी बसें चलानी पड़ी।

ट्रेनों में भी रही भीड़ : रोडवेज की इस हड़ताल के चलते सुबह यात्रियों ने रेलगाड़ियों का सहारा लिया, वहीं जिनके कार्यालय मेट्रो स्टेशनों के निकट थे, वे मेट्रो से दिल्ली गए। बहादुरगढ़ से सुबह चार व शाम को चार सवारी रेलगाड़ी बहादुरगढ़ आती हैं वहीं दिन में 8 एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में भी यात्रियों की संख्या में हल्का सा इजाफा हुआ।

6 जिलों की बसें नहीं आईं

हड़ताल के कारण झज्जर डिपो से तो बसें अन्य रूटों के लिए चलीं, लेकिन अन्य डिपो से आने वाली बसों का संचालन न होने से झज्जर आने वाले व झज्जर से जाने वाले लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ा। खासतौर पर चरखी दादरी डिपो की बस न आने से बहादुरगढ़-दिल्ली रोड, भिवानी डिपो से बेरी-गुरुग्राम, हिसार डिपो की बस न आने से बेरी-गुरुग्राम, रोहतक डिपो की बस न आने से रेवाड़ी-जयपुर की ओर जाने वाले यात्री परेशान हुए। इसी प्रकार रेवाड़ी, गुरुग्राम डिपो की बसें झज्जर-बेरी व रोहतक, हिसार रूट पर न चलने से दैनिक यात्री तकलीफ में रहे।

टिकरी स्टेशन तक आईं डीटीसी बसें

हरियाणा से बसें नहीं चलने से सबसे अधिक दिल्ली-बहादुरगढ़ रूट प्रभावित रहा क्योंकि प्राइवेट बसों को हाईवे पर खड़े होकर सवारियों को ढोना पड़ा। वहीं, प्राइवेट वैन आदि ने दिनभर टीकरी बाॅर्डर तक सवारियों को ढोया। बहादुरगढ़ में डीटीसी की करीब 52 बसें आती हैं। आज सभी बसों के टिकरी मेट्रो स्टेशन के नीचे खड़ा किया गया था।

बहादुरगढ़. हड़ताल के दौरान बस स्टैंड पर बस का इंतजार करते यात्री।

धरने पर दिनभर नारेबाजी करते रहे कर्मचारी

बहादुरगढ़ में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने रोडवेज कर्मचारियों के चक्का जाम का समर्थन किया। साथ ही हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग को लेकर 9 अगस्त को सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालने और 20 अगस्त को विधानसभा कूच करने की घोषणा की है। इससे पहले हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं ने सोमवार को हड़ताल को कामयाब बनाने के लिए बहादुरगढ़ डिपो का दौरा किया था।

हड़ताल सफल नहीं रही

कर्मचारी संगठनों की गुटबाजी के कारण हड़ताल सफल नहीं हो सकी। इससे आम यात्रियों को झज्जर डिपो से सुबह से ही सर्विस मिली। अन्य डिपो की बसें न आने से यात्रियों को थाेड़ी परेशानी हुई। - मेहताब खर्ब, जीएम रोडवेज, झज्जर

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