भीषण गर्मी में पेड़ राहत देते हैं। जहां पेड़ ज्यादा होते हैं, वहां दूसरी जगह की अपेक्षा तापमान कम रहता है। कैसे पेड़ों को सहेजकर हम गर्मी से राहत पा सकते हैं, यही साबित करने के लिए भास्कर टीम ने शुक्रवार को मामा-भांजा चौराहा और उससे एक किमी दूर ठंडी झिरी (जहां बांस के पेड़ लगे हुए हैं) पर तापमान देखा। मामा-भांजा चौराहे पर दोपहर एक बजे अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि ठंडी झिरी में उसी समय 40 डिग्री तापमान था। वन विभाग की ओर से वर्षों पहले विकसित हुई ठंडी झिरी में भीषण गर्मी में भी लोगों को राहत मिलती है। इस राह से गुजरने वाले लोग कुछ देर यहीं पर रुक जाते हैं। यहां पर बांस के करीब 800 पेड़ लगे हैं। इससे यहां का तापमान दूसरे स्थानों से छह डिग्री कम रहता है।
झालावाड़-बारां मेगा हाइवे पर आ रहे 25 पेड़ों को डिवाइडर की तरह काम लिया... और कटने से बचाया: झालावाड़ से बारां तक बनाए गए मेगा हाइवे पर मंडावर में प्रवेश करते ही पेड़ों का झुंड नजर आता है। यहां सड़क के बीच 25 पेड़ कटने से बचाए गए थे। इन्हें डिवाइडर की तरह काम में लिया जा रहा है। यह चौराहा हर सड़क के लिए मिसाल पेश कर रहा है।
समय: दोपहर 1 बजे
तापमान: 46 डिग्री
भास्कर नॉलेज: सूक्ष्म क्लाइमेट क्षेत्र में 4-50 कम होता है तापमान उद्यानिकी एवं वानिकी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डाॅ. पीएस चौहान का कहना है कि वृक्षारोपित क्षेत्र में सूक्ष्म क्लाइमेट का निर्माण होता है। यह क्षेत्र चार से पांच डिग्री तापमान कम करने की क्षमता रखते हैं। देश में चंडीगढ़ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां 40 फीसदी वृक्ष हैं। यहां तापमान दूसरे प्रदेशों से पांच डिग्री तक कम रहता है। पेड़ों वाले क्षेत्र में आक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। इन क्षेत्रों में रुकने, ठहरने, गुजरने से शुद्ध वायु मिलती है। लिहाजा अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, ताकि तापमान का मुकाबला किया जा सके।
समय: दोपहर 1 बजे
तापमान: 40 डिग्री